US-Iran Tension: अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में होगी परमाणु वार्ता, तेहरान में खामेनेई के खिलाफ फिर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से परमाणु वार्ता का रास्ता साफ हो गया है. दोनों देशों के प्रतिनिधि गुरुवार यानी 26 फरवरी को जिनेवा में परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करेंगे, लेकिन तेहरान में खामेनेई के खिलाफ फिर से विद्रोह शुरू हो गया है.

US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से परमाणु वार्ता का रास्ता साफ हो गया है. दोनों देशों के प्रतिनिधि गुरुवार यानी 26 फरवरी को जिनेवा में परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करेंगे, लेकिन तेहरान में खामेनेई के खिलाफ फिर से विद्रोह शुरू हो गया है.

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Suhel Khan
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Trump Vs Khamenei

अमेरिका-ईरान के बीच गुरुवार को होगी परमाणु वार्ता Photograph: (X@WhiteHouse/File)

US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से परमाणु वार्ता होने जा रही है. ये बातचीत फिर से जिनेवा में होगी. ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने रविवार को इसकी पुष्ट्र करते हुए कहा कि अगले दौर की बातचीत फिर से जिनेवा में होगी. जिसे लेकर ईरान ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जताई है लेकिन सैन्य टकराव की आशंका से अब भी इनकार नहीं किया जा सकता.

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दरअसल, ट्रंप हर हाल में ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम रोकने का दबाव बनाएंगे. लेकिन ईरान इसके लिए कभी राजी नहीं होगा. जिसे लेकर खामेनेई कई बार इनकार भी कर चुके हैं. इस बीच ईरान में एक बार फिर से खामेनेई के खिलाफ विद्रोह की आग भड़कने लगी है. अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता की पुष्ट्रि के बाद तेहरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.

ओमान और जिनेवा में हो चुकी हैं परमाणु वार्ता

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता से पहले भी दो बार परमाणु वार्ता हो चुकी है. लेकिन इन दोनों ही बैठकों में कोई ठोस समाधान नहीं निलका. इसके बाद अमेरिका और ईरान एक बार फिर से बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं. इससे पहले ओमान और जिनेवा में दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता हुई थी. गुरुवार को होने वाली परमाणु वार्ता को लेकर ईरान के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ अब्बास अराघची ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ से मुलाकात होगी. जिसमें राजनयिक समाधान की अच्छी संभावना बनी हुई है.

खामेनेई के खिलाफ ईरान में सुलग रही आग

गुरुवार को होने वाली परमाणु वार्ता की पुष्टि के बाद ईरान में फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. बताया जा रहा है कि रविवार को तहरीर विश्वविद्यालय और मशहद में छात्रों ने जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की याद में प्रदर्शन किया. ईरान की राज्य समाचार एजेंसी ने पांच विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन की जानकारी दी है.

बता दें कि बीते सप्ताह ही 40-दिवसीय श्रद्धांजलि समारोहों के दौरान सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की. मानवाधिकार संगठन की मानें तो पिछले विरोध प्रदर्शन में कम से कम 7,015 लोग मारे गए हैं, इनमें 214 सरकारी बल शामिल हैं. बता दें कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के शासन के खिलाफ यह अब तक का सबसे घातक प्रदर्शन माना जा रहा है. 

वार्ता के बाद ईरान के रुख में हो सकता है बदलाव

इस बीच रॉयटर्स के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि ईरान ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ वार्ता समाप्त होने के बाद से नई रियायतें दे रहा है. सूत्रों का कहना है कि तेहरान अपने क्षेत्र से अपने सबसे अधिक समृद्ध यूरेनियम का आधा हिस्सा हटाने, शेष को कम समृद्ध करने और एक क्षेत्रीय संवर्धन संघ के निर्माण में भाग लेने के संयोजन पर गंभीरता से विचार करेगा. वहीं जेरूसलम पोस्ट ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के गुरुवार को जिनेवा में होने वाली तेहरान-वाशिंगटन वार्ता में उपस्थित रह सकते हैं. वहीं सऊदी शाही सूत्र ने एन12 को बताया कि, "खामेनेई और उनके शासन को एक-एक करके खत्म करना होगा."

इराकी सशस्त्र समूह ईरान का समर्थन करने को तैयार

वहीं इराकी प्रतिरोध समन्वय समिति के एक वरिष्ठ सूत्र ने अल-अरबी अल-जदीद को बताया कि, ईरान समर्थक कई इराकी मिलिशिया अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की संभावना के लिए गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं. सूत्र के अनुसार, यह अब केवल मीडिया में कही गई बातें नहीं हैं; इस मुद्दे पर संगठनात्मक स्तर पर चर्चा हो चुकी है और प्रारंभिक निर्णय भी लिए जा चुके हैं.

ऐसा माना जाता है कि भविष्य में होने वाला कोई भी टकराव क्षेत्रीय प्रकृति का होगा, न कि किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित. सूत्रों के मुताबिक, कुछ समूहों ने सतर्कता स्तर बढ़ा दिया है, भर्ती अभियान तेज कर दिए हैं और अतिरिक्त प्रशिक्षण शुरू कर दिया है. इस ढांचे के अंतर्गत आने वाले सात समूहों में से चार ने सैद्धांतिक रूप से ईरान को सैन्य सहायता प्रदान करने और जमीनी स्थिति के आधार पर हमले की स्थिति में मोर्चेा खोलने का निर्णय लिया है.

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