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US Iran Tension: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद हालात और गंभीर हो गए, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस बयान को सीधे सैन्य दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़े तो इसका अंजाम खुला युद्ध हो सकता है. इस बीच एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल 6 एयरलाइंस ने अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी है. ऐसे में ये माना जा रहा है कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है.
आंतरिक अस्थिरता से जूझता ईरान
बीते कुछ हफ्तों से ईरान अंदरूनी संकट से भी घिरा हुआ है. देश में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक हजारों लोगों की जान जाने का दावा किया गया है. हालांकि हाल ही में प्रदर्शनों की तीव्रता कुछ कम हुई थी, लेकिन अमेरिका के साथ बढ़ती बयानबाजी ने एक बार फिर माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि बाहरी दबाव और आंतरिक असंतोष का यह मेल हालात को और विस्फोटक बना सकता है.
Air France and KLM suspend flights to Dubai, other Middle East cities due to ongoing geopolitical situation; US has threatened military action on Iran. pic.twitter.com/d4tIIa47Zt
— The Standard Digital (@StandardKenya) January 24, 2026
एयरलाइंस पर सीधा असर, उड़ानें स्थगित
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी साफ नजर आने लगा है. सुरक्षा कारणों से कई यूरोपीय एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट के लिए अपनी उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी हैं. एयर फ्रांस ने पेरिस से दुबई जाने वाली उड़ानों को फिलहाल रोक दिया है.
केएलएम ने दुबई, रियाद, दम्माम और तेल अवीव के लिए सेवाएं बंद कर दी हैं और ईरान, इराक व इज़राइल के हवाई क्षेत्र से बचने का फैसला किया है. इसके अलावा ब्रिटिश एयरवेज, लक्सएयर और ट्रांसाविया की कई उड़ानें भी रद्द कर दी गई हैं. लुफ्थांसा ने तेहरान के लिए मार्च के अंत तक उड़ानें स्थगित कर दी हैं और तेल अवीव व जॉर्डन के लिए सीमित सेवाएं चला रही है.
यात्रियों में डर, बाजारों में बेचैनी
उड़ानों के रद्द होने से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं. खाड़ी देशों से जुड़े व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी इसका असर दिखने लगा है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और शेयर बाजार भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट में किसी भी बड़े सैन्य टकराव से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है.
आगे क्या?
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों ही पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं. हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. अगर यह टकराव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा और सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ा, तो इसका असर केवल इन दो देशों तक नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मिडिल ईस्ट और दुनिया इसकी चपेट में आ सकती है.
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