ईरान में नहीं थमेगी ट्रंप की सैन्य कार्रवाई, अमेरिकी सीनेट में खारिज हुआ युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव

US-Israel Attack Iran: अमेरिका और इजरायल ईरान में लगातार बमबारी कर रहा है. ये सैन्य कार्रवाई अभी नहीं थमेगी, क्योंकि अमेरिकी सीनेट में ईरान में युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव खारिज हो गया है. इसके बाद साफ हो गया है कि ईरान में अभी और तबाही मचेगी.

US-Israel Attack Iran: अमेरिका और इजरायल ईरान में लगातार बमबारी कर रहा है. ये सैन्य कार्रवाई अभी नहीं थमेगी, क्योंकि अमेरिकी सीनेट में ईरान में युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव खारिज हो गया है. इसके बाद साफ हो गया है कि ईरान में अभी और तबाही मचेगी.

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Suhel Khan
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US Iran War

ईरान में जारी रहेगी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई Photograph: (X@WhiteHouse/ANI)

US-Israel Attack Iran: इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान में भारी तबाही मचा रहे हैं. वहीं ईरानी मिसाइलों ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थित कर दिया है. खाड़ी के लगभग सभी देश इस युद्ध की आग में झुलस रहे हैं. इस बीच अमेरिका से एक बड़ी खबर आई है. जो ईरान में तबाही के साफ संकेत दे रही है. दरअसल, अमेरिकी सीनेट में ईरान में युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव नामंजूर हो गया है. जिससे साफ हो गया है कि अमेरिका ईरान में अभी और तबाही मचाएगा.

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युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव US सीनेट में खारिज

बता दें  कि अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सीमित करने के लिए युद्ध शक्ति प्रस्ताव लाया गया था, जिसे सीनेट ने खारिज कर दिया है. यह प्रस्ताव मुख्य रूप से पार्टी लाइन के आधार पर 47-53 मतों से सीनेट में नामंजूर हो गया. बुधवार (स्थानीय समयानुसा) को सीनेट के रिपब्लिकन सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत दिलाई. उन्होंने डेमोक्रेट्स के नेतृत्व वाले उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसका उद्देश्य ईरान में उनकी सैन्य कार्रवाइयों पर लगाम लगाना था.

ईरान में युद्ध के खिलाफ कौन लाया था प्रस्ताव?

बता दें कि ईरान में युद्ध रोकने के लिए अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट टिम केन और रिपब्लिकन रैंड पॉल लेकर आए थे. इस द्विदलीय प्रस्ताव में यह प्रावधान था कि जब तक कांग्रेस इस अभियान को अधिकृत नहीं करती, तब तक ईरान में सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेनाओं को वापस बुलाना अनिवार्य होगा. लेकिन कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के ऊपरी सदन में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत होने की वजह से ये प्रस्ताव खारिज हो गया. इसी के साथ अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में चलाए जा रहे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंजूरी मिल गई. जो ट्रंप की एक बड़ी जीत मानी जा रही है.

डेमोक्रेट्स ने लगाया ट्रंप पर आरोप

ईरान में सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने तर्क है कि ट्रंप ने हवाई हमले का आदेश देते समय असंवैधानिक रूप से कांग्रेस को नजरअंदाज किया. इसके साथ ही डेमोक्रेट्स का कहना है कि प्रशासन ने युद्ध के लिए बदलते हुए औचित्य पेश किए हैं. प्रशासन के अधिकारियों से मिली गोपनीय जानकारी के बाद टिम केन ने बताया कि, मैं इसे इस तरह से कहूंगा कि उस कमरे में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया था. जिससे यह संकेत मिलता हो कि अमेरिका को ईरान से कोई तत्काल खतरा है.

ईरान में युद्ध को लेकर क्या बोले ट्रंप?

वहीं ईरान में जारी अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, ईरान के साथ युद्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल एक मजबूत स्थिति में हैं. इसके साथ ही उन्होंने इस्लामी गणराज्य के खिलाफ "आगे बढ़ते रहने" का संकल्प भी लिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी अंततः मारे जाते हैं, साथ ही तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडार को भी तेजी से तबाह किया जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि, "युद्ध के मोर्चे पर हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, सीधे शब्दों में कहें तो किसी ने पूछा कि 10 में से आप इसे कितने अंक देंगे? मैंने कहा लगभग 15." राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों को संबोधित करते हुए ये बात कही.

28 फरवरी को किया था अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला

बता दें कि इजरायल और अमेरिका ने बीते शनिवार यानी 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. जबकि ईरान के कई टॉप लीडर और शीर्ष सैन्य अधिकारी भी इस हमले में मारे गए. यही नहीं खामेनेई की पत्नी, बेटा, बेटी दामाद समेत परिवार के कई और भी सदस्य युद्ध में मारे जा चुके हैं.

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