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डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी Photograph: (X/whitehouse)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. ट्रंप ने कनाडा पर आरोप लगाया है कि वह 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम का साथ न देकर पूरे उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है.
क्या है यह पूरा विवाद?
राष्ट्रपति ट्रंप कनाडा के रवैये से काफी नाराज हैं. उनका कहना है कि कनाडा सुरक्षा सहयोग करने के बजाय चीन के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते सुधारने में ज्यादा लगा है. ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दे दी कि अगर कनाडा ने अपनी नीति नहीं बदली, तो चीन एक साल के भीतर उसे आर्थिक रूप से पूरी तरह निगल सकता है. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका दशकों से कनाडा की रक्षा करता आया है, इसलिए कनाडा को अमेरिका की नई सुरक्षा पहल का शुक्रगुजार होना चाहिए.
क्या है 'गोल्डन डोम' सिस्टम?
'गोल्डन डोम' अमेरिका की एक बड़ी डिफेंस योजना है. इसका मकसद साउथ अमेरिका को लंबी दूरी की मिसाइलों के हमलों से बचाना है. इसमें स्पेस सेंसर, हाई-टेक रडार और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने वाली एडवांस तकनीक का इस्तेमाल होगा. इसमें ग्रीनलैंड की लोकेशन बहुत अहम है क्योंकि यह आर्कटिक क्षेत्र में है, जहां से मिसाइल हमले का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
कनाडा को क्या है परेशानी?
भले ही अमेरिका इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, लेकिन कनाडा की सरकार को अपनी आजादी और फैसलों पर खतरा महसूस हो रहा है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में डावोस (World Economic Forum) की मीटिंग में कहा कि ताकतवर देशों को दूसरों पर दबाव नहीं डालना चाहिए. उनके इस बयान को अमेरिका के लिए एक सीधे जवाब के तौर पर देखा गया.
ट्रंप का पलटवार और बिगड़ते रिश्ते
कार्नी के बयान से नाराज होकर ट्रंप ने उन्हें अपनी 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) पहल से दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया है. डिप्लोमेसी की भाषा में इसे एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है. इसका मतलब साफ है कि अब बात सिर्फ मिसाइल सिस्टम तक नहीं रही, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी हो गई है.
चीन का एंगल और आगे की राह
अमेरिका का मानना है कि कनाडा अगर चीन के साथ नए व्यापारिक समझौते करता है, तो इससे पश्चिमी देशों का सुरक्षा ढांचा कमजोर होगा.दूसरी तरफ, कनाडा का कहना है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था के लिए स्वतंत्र फैसले लेने का हक रखता है.
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