ईरान से तनाव के बीच अमेरिकी सैनिकों के बीच टॉयलेट वॉर, क्यों आपस में लड़ रहे ट्रंप के सोल्जर?

एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सख्त बयानबाज़ी कर रहे हैं और पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और महंगे विमानवाहक पोत पर तैनात हजारों सैनिक एक अलग ही संकट से जूझ रहे हैं.

एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सख्त बयानबाज़ी कर रहे हैं और पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और महंगे विमानवाहक पोत पर तैनात हजारों सैनिक एक अलग ही संकट से जूझ रहे हैं.

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Dheeraj Sharma
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US Soldgers Toilet war

एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सख्त बयानबाज़ी कर रहे हैं और पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और महंगे विमानवाहक पोत पर तैनात हजारों सैनिक एक अलग ही संकट से जूझ रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford पर इन दिनों असली चिंता किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की नहीं, बल्कि जाम हो रहे टॉयलेट्स की है. 

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करीब 5,000 से अधिक नाविकों को लेकर समुद्र में तैनात यह पोत तकनीकी रूप से अत्याधुनिक है, लेकिन लंबे समय से समुद्र में लगातार मौजूदगी ने इसकी आंतरिक व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है.

जून से समुद्र में तैनाती, बढ़ती मुश्किलें

यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से लगातार समुद्र में है। शुरू में उम्मीद थी कि एक विशेष मिशन के बाद इसकी तैनाती समाप्त हो जाएगी और चालक दल को वापसी का मौका मिलेगा. लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के चलते इसकी तैनाती को आगे बढ़ा दिया गया.

आमतौर पर शांतिकाल में किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती छह महीने तक होती है. हालांकि, फोर्ड पर तैनात सैनिक अब आठ महीने से अधिक समय समुद्र में बिता चुके हैं. संभावना जताई जा रही है कि यह अवधि 11 महीने तक खिंच सकती है. यदि ऐसा हुआ, तो यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे लंबी तैनातियों में से एक होगी.

13 अरब डॉलर का जहाज और सीवेज संकट

करीब 13 अरब डॉलर की लागत से बना यह पोत तकनीकी चमत्कार माना जाता है. इसमें अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, उन्नत रडार और आधुनिक वैक्यूम-आधारित सीवेज सिस्टम लगाया गया है. लेकिन यही जटिल वैक्यूम सिस्टम अब परेशानी की वजह बन गया है.

रिपोर्टों के अनुसार, यदि एक टॉयलेट में गड़बड़ी होती है तो पूरे सेक्शन की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है. लंबे समय तक नियमित रखरखाव न हो पाने के कारण लगभग 650 टॉयलेट्स में रुकावट की समस्या सामने आई है.

मनोबल और मेंटिनेंस पर असर

लगातार समुद्र में रहने से न केवल तकनीकी रखरखाव प्रभावित हो रहा है, बल्कि सैनिकों के मनोबल पर भी असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सैन्य ताकत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन प्रबंधन से भी तय होती है.

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह स्थिति दिखाती है कि विशाल सैन्य शक्ति के पीछे भी रोजमर्रा की बुनियादी चुनौतियां कितनी अहम होती हैं. फिलहाल, यूएसएस फोर्ड पर तैनात नाविकों के लिए सबसे बड़ा मिशन किसी युद्ध अभियान से पहले अपने जहाज की आंतरिक व्यवस्था को दुरुस्त करना है.

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