अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति पर मचा बवाल, रिपब्लिकन नेता ने बताया 'सांस्कृतिक हमला'

टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक रिपब्लिकन एक्टिविस्ट ने इसे अमेरिका पर 'बाहरी हमला' बताया, जिसके बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इसे निजी जमीन पर अपनी आस्था का प्रतीक बताया.

टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक रिपब्लिकन एक्टिविस्ट ने इसे अमेरिका पर 'बाहरी हमला' बताया, जिसके बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इसे निजी जमीन पर अपनी आस्था का प्रतीक बताया.

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Ravi Prashant
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मूर्ति विवाद Photograph: (x/@Carlos__Turcios)

अमेरिका के टेक्सास से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. वहां के शुगर लैंड में स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची प्रतिमा (जिसे 'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' कहा जाता है) उसे लेकर एक स्थानीय नेता ने विवादित बयान दे दिया है. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और भारतीय मूल के लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.

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क्या कहा अमेरिकी एक्टिविस्ट ने?

डलास-फोर्ट वर्थ इलाके के रिपब्लिकन एक्टिविस्ट कार्लोस टुरसियस ने हनुमान जी की इस भव्य मूर्ति का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर शेयर किया. वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, "यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत की नई दिल्ली नहीं है. यह टेक्सास का शुगर लैंड है. बाहरी लोग धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं." उन्होंने इस प्रतिमा को एक तरह का 'सांस्कृतिक हमला' बताते हुए इसे रोकने की मांग की.

भारतीय समुदाय ने दिया मुंहतोड़ जवाब

कार्लोस के इस पोस्ट पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अन्य यूजर्स ने उन्हें तुरंत जवाब देना शुरू कर दिया. लोगों ने याद दिलाया कि यह प्रतिमा मंदिर की निजी जमीन पर खड़ी है और इसे हिंदू समुदाय ने अपने पैसों से बनाया है. एक यूजर ने लिखा, "यह निजी संपत्ति है और इसे हिंदुओं ने अपनी मेहनत की कमाई से बनाया है. आप नफरत फैलाने की कोशिश बंद करें.

भाषा और पहचान पर पलटवार

विवाद के बीच एक यूजर ने अमेरिका के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कार्लोस को आईना दिखाया. यूजर ने कहा, "अमेरिका में 4 करोड़ से ज्यादा लोग स्पेनिश बोलते हैं, जबकि टॉप 10 भाषाओं में भारत की कोई भाषा नहीं है. इसका मतलब है कि भारतीय लोग अमेरिका की संस्कृति में सबसे ज्यादा रचे-बसे हुए हैं. आपको भारतीय समुदाय के स्तर तक आने में अभी बहुत समय लगेगा."

पहले भी विवादों में रहे हैं कार्लोस

यह पहली बार नहीं है जब कार्लोस टुरसियस ने भारतीय प्रवासियों को लेकर ऐसी बात कही हो. इससे पहले भी वह H-1B वीजा प्रोग्राम की आलोचना कर चुके हैं और टेक्सास के फ्रिस्को जैसे शहरों में भारतीयों की बढ़ती संख्या को 'कब्जा' बता चुके हैं. फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस और मार्जोरी टेलर ग्रीन जैसे नेता भी वीजा सिस्टम को लेकर इसी तरह के विचार रखते रहे हैं.

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