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पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मंगलवार को हुए एक भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर सुरक्षा हालातों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेना के मुताबिक, बाजौर जिले में आतंकवादियों ने एक संयुक्त सुरक्षा चौकी को निशाना बनाया, जिसमें 11 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। इस हमले में कई नागरिक भी घायल हुए हैं.
विस्फोटकों से भरी गाड़ी से हमला
घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बजौर इलाके में हुई, जहां हमलावरों ने विस्फोटकों से लदी एक वाहन को सुरक्षा चौकी की दीवार से टकरा दिया. धमाका इतना जबरदस्त था कि चौकी की इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया। मलबे में दबकर 11 जवानों की जान चली गई.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह हमला सुनियोजित था और इसका उद्देश्य क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाना था। घटना के बाद इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है.
नागरिकों को भी भारी नुकसान
विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के रिहायशी घर भी उसकी चपेट में आ गए. कई मकानों की दीवारें दरक गईं और खिड़कियां टूट गईं। इस हादसे में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि महिलाओं और बच्चों समेत सात अन्य लोग घायल हो गए.
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है. स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है.
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— Mazaj News (@Mazajnews1) February 17, 2026
बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां
खैबर पख्तूनख्वा का सीमावर्ती इलाका लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है. हाल के महीनों में यहां सुरक्षा बलों और आतंकवादी संगठनों के बीच मुठभेड़ों की घटनाएं बढ़ी हैं. इस ताजा हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार से सक्रिय आतंकी नेटवर्क और स्थानीय सहयोगियों के कारण ऐसे हमलों की आशंका बनी रहती है. सेना ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार का कड़ा रुख
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि देश में शांति और स्थिरता को बाधित करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी. सरकार ने भी आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. बाजौर में हुए इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और सुरक्षा बलों को लगातार सतर्क रहना होगा.
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