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Tarique Rahman Sworn: पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. हालिया आम चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान मंगलवार, 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे अहम पड़ाव होगा, क्योंकि वे पहली बार प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस शपथ के साथ ही वह 6 दशक पुरानी परंपरा को भी तोड़ेंगे.
60 साल पुरानी परंपरा में बदलाव
इस बार शपथ ग्रहण समारोह पारंपरिक स्थल बंगभवन के बजाय पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा. पिछले छह दशकों से प्रधानमंत्री पद की शपथ बंगभवन में होती रही है, लेकिन इस बार इस परंपरा को बदला गया है.
सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, राष्ट्रपति मो. शाहबुद्दीन दोपहर में संसद परिसर के साउथ प्लाजा में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्यों को शपथ दिलाएंगे. इससे पहले नवनिर्वाचित सांसद सुबह शपथ लेंगे और BNP संसदीय दल की बैठक कर अपने नेता की औपचारिक घोषणा करेगी.
चुनावी जीत और राजनीतिक संदेश
बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, BNP ने 297 में से 209 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं. स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौट रही BNP ने इस जीत को ‘जनादेश’ बताया है.
रहमान ने चुनाव परिणामों के बाद अपने राजनीतिक विरोधियों से मुलाकात कर बधाई दी. यह कदम उनके मेल-मिलाप के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. वे अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus की जगह लेंगे, जिनके कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला था.
भारत की भागीदारी
शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष Om Birla करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, विदेश सचिव और लोकसभा महासचिव भी उनके साथ मौजूद रह सकते हैं. बांग्लादेश की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण भेजा गया था, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते वे शामिल नहीं हो पाएंगे.
क्षेत्रीय कूटनीति पर नजर
समारोह में मालदीव के राष्ट्रपति Mohamed Muizzu सहित कई क्षेत्रीय नेता भी मौजूद रहेंगे. इससे साफ है कि रहमान की नई सरकार क्षेत्रीय सहयोग और कूटनीतिक संतुलन पर विशेष ध्यान दे सकती है.
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण के साथ बांग्लादेश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जिस पर पूरे दक्षिण एशिया की नजरें टिकी हैं.
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