बांग्लादेश चुनाव के बाद शेख हसीना का तीखा हमला, परिणामों को बताया ‘हास्यास्पद, रद्द करने की मांग

बांग्लादेश में बुधवार, 12 फरवरी को 299 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव संपन्न हो गए. यह चुनाव इसलिए खास माना जा रहा था क्योंकि 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए व्यापक आंदोलन और उनके देश छोड़ने के बाद यह पहला आम चुनाव था.

बांग्लादेश में बुधवार, 12 फरवरी को 299 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव संपन्न हो गए. यह चुनाव इसलिए खास माना जा रहा था क्योंकि 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए व्यापक आंदोलन और उनके देश छोड़ने के बाद यह पहला आम चुनाव था.

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Dheeraj Sharma
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Sheikh Hasina

बांग्लादेश में बुधवार, 12 फरवरी को 299 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव संपन्न हो गए. यह चुनाव इसलिए खास माना जा रहा था क्योंकि 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए व्यापक आंदोलन और उनके देश छोड़ने के बाद यह पहला आम चुनाव था. हालांकि मतदान प्रतिशत 50 फीसदी से कम रहने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. वहीं चुनाव को लेकर शेख हसीना का बड़ा बयान भी सामने आया. उन्होंने न सिर्फ चुनाव को हास्यास्पद बताया बल्कि इसे रद्द करने की मांग भी की. 

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जनादेश के खिलाफ है चुनाव-हसीना

देश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनाव को नकार दिया है. ये जनादेश के खिलाफ है, सोची समझी रणनीति के तहत चुनाव काराया गया है, इसे रद्द कर देना चाहिए. 

“सुनियोजित नाटक था यह चुनाव”

जनता के नाम जारी अपने संदेश में शेख हसीना ने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व ने अवैध और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया. उन्होंने कहा कि बुधवार को कराया गया चुनाव एक “सुनियोजित नाटक” था, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का दिखावा करना था.

हसीना ने दावा किया कि चुनाव ऐसे माहौल में कराया गया, जहां उनकी पार्टी अवामी लीग की भागीदारी नहीं थी. उनके अनुसार, विपक्ष की गैरमौजूदगी में कराया गया मतदान लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं कहा जा सकता.

यूनुस पर सीधा आरोप

अपने बयान में शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव 'फासीवादी रवैये' का उदाहरण है और जनता के मतदान अधिकारों की अनदेखी की गई है.

हसीना ने विशेष रूप से महिलाओं, अल्पसंख्यक समुदायों और आम नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने इस चुनाव को अस्वीकार कर लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है.

कम मतदान पर उठे सवाल

चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, 299 सीटों पर हुए मतदान में 50 प्रतिशत से कम वोटिंग दर्ज की गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कम मतदान कई कारणों से हो सकता है-राजनीतिक अस्थिरता, विपक्ष की अनुपस्थिति और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता में अविश्वास.

हालांकि, अंतरिम सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि चुनाव शांतिपूर्ण और संवैधानिक ढांचे के तहत संपन्न हुए.

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