Bangladesh Violence: 45 दिनों में बांग्लादेश में 15 हिंदुओं की मौत, RRAG रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में एक दिसंबर 2025 से लेकर 15 जनवरी 2026 तक यानी कुल 45 दिनों में 15 हिंदुओं की हत्या की गई है. यानी हर तीसरे दिन एक हिंदू को बांग्लादेश में मार दिया गया.

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में एक दिसंबर 2025 से लेकर 15 जनवरी 2026 तक यानी कुल 45 दिनों में 15 हिंदुओं की हत्या की गई है. यानी हर तीसरे दिन एक हिंदू को बांग्लादेश में मार दिया गया.

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Jalaj Kumar Mishra
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15 Hindus Killed in Bangladesh in last 45 days amid Bangladesh Violence

Bangladesh Violence

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में लंबे वक्त से हिंदुओं के साथ उत्पीड़न और अत्याचार जारी है. जब से शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया है, तब से हालात बद से बदतर हो गए हैं. इस बीच, राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुुप (आरआरएजी) ने बांग्लादेश में जारी हिंसा से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में पिछले 45 दिनों में 15 हिंदुओं की हत्या हो गई है. बांग्लादेश में पिछले 45 दिनों में हर तीन दिन में एक हिंदू की हत्या हुई है.  

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रिपोर्ट में आरआरएजी ने कहा कि एक दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच पिछले 45 दिनों में बांग्लादेश में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय ने कम से कम 15 अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या कर दी है. 

45  दिनों में 15 हिंदुओं की हत्या

आरआरएजी ने अपने रिपोर्ट में 15 हिंदुओं की हत्या के दावे के साथ-साथ, उनके नामों की लिस्ट भी जारी की है.

  1. 2 दिसंबर 2025 को प्रांतोष कोरमोकर और उत्पोल सरकार
  2. 7 दिसंबर 2025 को जोगेश चंद्र रॉय और सुबोर्ना रॉय
  3. 12 दिसंबर 2025 को शांतो चंद्र दास
  4. 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास
  5. 24 दिसंबर 2025 को अमृत मंडल
  6. 29 दिसंबर 2025 को बजेंद्र विश्वास
  7. 31 दिसंबर 2025 को खोकोन चंद्र दास
  8. 5 जनवरी 2026 को राणा प्रताप बैरागी
  9. 6 जनवरी 2026 को मिथुन सरकार और शरत मणि चक्रवर्ती
  10. 10 जनवरी 2026 को जॉय महापात्रा
  11. 11 जनवरी 2026 को समीर दास और प्रोले चाकी

रिपोर्ट में क्या कहा गया

बांग्लादेश में जिन 15 हिंदुओं की हत्या हुई है, उन मृतकों में सुबोर्ना रॉय जैसी बुजुर्ग महिलाएं और 18 साल के शांता जैसे युवक भी शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के सभी मामले सुनियोजित थे. हिंसा की शुरुआत पीड़ितों की संपत्ति को निशाना बनाकर किया गया, जैसे- समीर दास और शांता दास. कट्टरपंथियों ने दोनों के ऑटो-रिक्शा छीन लिए थे. रिपोर्ट के अनुसार, कई हत्याएं तालिबान शैली में भी की गई हैं. 

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