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अमेरिका और इस्राइल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. ऐसे में कहा जा रहा है कि कच्चे तेल के दाम भी बढ़ सकता है, क्योंकि अगर युद्ध लंबा हुआ है तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट बंद हो जाएगा, जिसका असर साफ तौर पर भारत के तेल बाजार, शेयर बाजार और सोने-चांदी के बाजार में दिख सकता है.
भारत की जरूरत का 50 प्रतिशत तेल होर्मुज स्ट्रेट से ही आता है
कहा जा रहा है कि अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई में कटौती होगी और कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी. वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है. भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तेल आयात करता है, जिसमें से 50 प्रतिशत क्रूड होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही आता है.
दिल्ली में कितनी हो सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के वजह से देश की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 95 रुपये से बढ़कर 105 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं, डीजल 88 रुपये से बढ़कर 96 रुपये तक पहुंच सकता है. बता दें, सरकारी तेल कंपनियां भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय करती हैं. ध्यान रहे कि कंपनियां सिर्फ बेस प्राइस ही तय करती है. आम आदमी को मिलने वाले तेल की अंतिम कीमत में केंद्र और राज्य सरकार का टैक्स अधिक होता है.
सोने-चांदी की कीमतों में भी हो सकता है इजाफा
तेल के अलावा, सोने-चांदी की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है. कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया की मानें तो सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है. चांदी 2.67 लाख रुपए किलो है जो बढ़कर 3.50 लाख तक पहुंच सकती है. युद्ध के वक्त में निवेशक 'सोने' को सुरक्षित मानते हैं.
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