Pakistan सामूहिक हत्याओं के खतरे वाले देशों की सूची में फिर शीर्ष पर

रिपोर्ट में तालिबान की एक स्थानीय शाखा की हिंसा का हवाला दिया गया है, जो पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए मुख्य चुनौतियों में से एक है.

रिपोर्ट में तालिबान की एक स्थानीय शाखा की हिंसा का हवाला दिया गया है, जो पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए मुख्य चुनौतियों में से एक है.

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Nihar Saxena
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लगातार तीसरी बार सामूहिक हत्याओं वाले देशों की सूची में शीर्ष पर.( Photo Credit : न्यूज नेशन)

अमेरिकी थिंक टैंक अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट के नए आकलन के अनुसार पाकिस्तान (Pakistan) लगातार तीसरी बार बड़े पैमाने पर हत्याओं के जोखिम वाले देशों की सूची में सबसे ऊपर आया है. अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट ने अपनी 28 पेज की इस रिपोर्ट में कहा कि आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की बढ़ती हिंसा समेत पाकिस्तान को घरेलू मोर्चे पर सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. द अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट अमेरिका के होलोकॉस्ट मेमोरियल म्यूजियम के साइमन-स्कजोड सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ जेनोसाइड और डार्टमाउथ कॉलेज में डिकी सेंटर फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग की एक संयुक्त पहल है.सामूहिक हत्याओं के जोखिम वाले देशों की शीर्ष दस सूची में एशियाई देशों में म्यांमार दूसरे और यमन तीसरे स्थान पर है

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टीटीपी ने विगत दिनों जून में हुआ संघर्ष विराम समझौता किया है रद्द
अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट एक शोध संगठन है, जो बड़े पैमाने पर सामूहिक हिंसा के खतरों वाले देशों की पहचान करता है. रिपोर्ट में तालिबान की एक स्थानीय शाखा की हिंसा का हवाला दिया गया है, जो पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए मुख्य चुनौतियों में से एक है. गौरतलब है कि यह रिपोर्ट उस समय आई है, जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने विगत दिनों सरकार के साथ हुए संघर्ष विराम के समझौते को वापस ले लिया है. जून में सरकार के साथ टीटीपी का संघर्ष विराम पर समझौता हुआ था. इसे खत्म करते ही टीटीपी ने अपने लड़ाकों को देश भर में आतंकी हमले करने का आदेश दिया है. संघर्ष विराम समझौता खत्म करने वाले बयान में प्रतिबंधित संगठन कहा, 'चूंकि विभिन्न क्षेत्रों में पाकिस्तान सेना मुजाहिदीन के खिलाफ सैन्य अभियान चल रही है... इसलिए अब यह जरूरी हो जाता है कि टीटीपी कैडर पूरे देश में जहां कहीं भी हमले कर सकते हैं, करें.'

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अफगान तालिबान का करीबी है टीटीपी
इस्लामिक संगठन टीटीपी के हिंसक आतंकी हमलों में बीते कुछ समय से तेजी आई है. पिछले महीने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत जिले में टीटीपी के आतंकी हमले में छह पुलिसकर्मी मारे गए थे. अफगान तालिबान का करीबी और पाकिस्तान का स्थानीय आतंकी दल टीटीपी को संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक अफगानिस्तान में इसके 4,000 से 6,500 लड़ाके हैं. टीटीपी की दखल कबायली क्षेत्रों से बाहर पाकिस्तानी शहरों तक है. अर्ली वार्निंग प्रोजेक्ट के मुताबिक 2021 के अंत तक पाकिस्तान में तालिबान आंदोलन और संबंधित कट्टर इस्लामिक समूहों ने बड़े पैमाने पर सामूहिक हत्याएं कीं. 

HIGHLIGHTS

  • अफगान तालिबान के बेहद करीब है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
  • टीटीपी ने संघर्ष विराम खत्म कर देश भर में दिए आतंकी हमलों के निर्देश
  • थिंक टैंक अली वार्निंग प्रोजेक्ट की सूची में म्यांमार और यमन भी हैं शामिल
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