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सिर्फ देश ही नहीं विदेशी मीडिया भी हुआ राममय, देखें विदेशी मीडिया ने की कैसी कवरेज

अयोध्या (Ayodhya) में राममंदिर (Ram Mandir) के भूमिपूजन (Bhoomi Pujan) को लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है. दुनिभाभर की मीडिया ने इसे प्रमुखता दी है. विदेशी मीडिया ने राममंदिर का जिक्र करते हुए बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी उठाया.

News Nation Bureau | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 06 Aug 2020, 09:46:12 AM
Ayodhya

सिर्फ देश ही नहीं विदेशी मीडिया भी हुआ राममय (Photo Credit: न्यूज नेशन)

नई दिल्ली:

अयोध्या (Ayodhya) में राममंदिर (Ram Mandir) के भूमिपूजन (Bhoomi Pujan) को लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है. दुनिभाभर की मीडिया ने इसे प्रमुखता दी है. विदेशी मीडिया ने राममंदिर का जिक्र करते हुए बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी उठाया. अमेरिकी न्यूज साइट सीएनएन ने कहा कि देश में फैले कोरोनावायरस के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर निर्माण का भूमि पूजन किया. सीएनएन ने लिखा कि मोदी ने हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थान पर राम मंदिर का भूमि पूजन किया. यह जगह सालों से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद का जड़ रही है.

पाकिस्तान के अखबार द डॉन ने लिखा कि राम मंदिर का शिलान्यास दरअसल भारत के बदल रहे संविधान का शिलान्यास है. डॉन ने लिखा कि बाबरी मस्जिद की जगह पर हिंदू मंदिर का शिलान्यास किया गया। इस जगह पर करीब 500 सालों से बाबरी मस्जिद थी. मोदी के आलोचक मानते हैं कि यह सेक्युलर भारत को हिंदू राष्ट्र में बदलने का एक और कदम है. भारत के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) के पूर्व अध्यक्ष प्रताप भानु मेहता के हवाले से डॉन ने लिखा - राम मंदिर का शिलान्यास एक तरह से अलग प्रकार के भारतीय संविधान का शिलान्यास है. यह इस बात को बताता है कि भारत का मौलिक संवैधानिक ढांचा बदल रहा है.

ब्रिटेन के अखबार द गार्जियन ने लिखा कि अयोध्या में दिवाली तीन महीने पहले ही आ गई है. शहर में राम मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है. दशकों से यह भारतीय इतिहास का सबसे भावनात्मक और विभाजनकारी मुद्दा रहा है. भगवान राम हिंदुओं में सबसे ज्यादा पूजनीय हैं. उनका मंदिर बनना बहुत से हिंदुओं के लिए गर्व का क्षण है. लेकिन, भारतीय मुसलमानों के मन में दो तरह की भावनाएं हैं. एक तो उनकी मस्जिद के जाने का दु:ख है जो 400 सालों से वहां खड़ी थी. दूसरा- उन्होंने मंदिर निर्माण पर अपनी मौन सहमति भी दे दी है.

खाड़ी देशों के चैनल अल जजीरा ने लिखा कि मस्जिद की जगह पर मंदिर बनाया जा रहा है. भारत की सेक्युलर विचारधारा से समझौता किया गया है. भारत की सत्ता में मौजूद हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने 1980 के दशक से मंदिर आंदोलन छेड़ा था. 1992 में हिंदू कट्‌टरपंथियों ने मस्जिद गिरा दी. नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को भी मस्जिद की जगह दे दी. इस फैसले की बड़ी आलोचना हुई थी. विडंबना यह है कि मंदिर की नींव रखी जा रही और बाबरी विध्वंस मामले की कानूनी सुनवाई तक अभी पूरी नहीं हुई है.

बीबीसी ने भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद का भी जिक्र किया. बीबीसी ने लिखा- प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर का भूमि पूजन किया. 1992 तक यहां मस्जिद थी. जिसे भीड़ ने गिरा दिया था. दावा किया जाता है कि यहां मस्जिद से पहले मंदिर था. इसलिए दोनों समुदाय इस जगह पर दावा करते रहे. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया. मुस्लिमों को मस्जिद के लिए अलग जगह दी गई. 

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First Published : 06 Aug 2020, 09:46:12 AM

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