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चीन के साथ पाक का गठजोड़ अमेरिका और उसके सहयोगियों को कर सकता है क्रोधित

चीन के साथ पाक का गठजोड़ अमेरिका और उसके सहयोगियों को कर सकता है क्रोधित

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 15 Nov 2021, 05:15:01 PM
China-Pakitan

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: चीन के साथ एक पूर्ण रणनीतिक गठबंधन बनाने का पाकिस्तान का फैसला अमेरिका और उसके सहयोगियों के क्रोध को आमंत्रित कर सकता है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।

पाकिस्तान संसद के सदस्यों को बताया गया कि देश अमेरिका और चीन के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, ऐसा लगता है कि संतुलन हासिल करने के पाकिस्तान के प्रयासों ने वांछित परिणाम नहीं दिए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है , एक सांसद ने एक वरिष्ठ व्यक्ति के हवाले से कहा, इस समय अमेरिका के साथ संबंध सबसे निचले स्तर पर हैं।

चीन के साथ पाकिस्तान के पुराने संबंधों ने अतीत में इस्लामाबाद को वाशिंगटन और बीजिंग के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में मदद की है, जिससे कुछ हद तक लाभ की स्थिति प्राप्त हुई है। लेकिन खुद को एक बदले हुए भू-रणनीतिक ढांचे में पाते हुए, पाकिस्तान अब इसे एक आसान काम के रूप में नहीं देखता है।

जैसे-जैसे चीन सभी मोचरें पर अमेरिका की बराबरी करने के करीब आता जा रहा है, वैसे-वैसे ऐसे संकेत दिखने लगे हैं कि पर्यवेक्षक इसे नए शीत युद्ध के रूप में देख रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान को अपने गठबंधनों में संतुलन बनाए रखने के चुनौतीपूर्ण कार्य का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तरफ, बीजिंग मुश्किल समय में इस्लामाबाद के साथ खड़ा रहा है और एक प्रमुख निवेशक के रूप में उभरा है, लेकिन दूसरी ओर, इस्लामाबाद को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय और अन्य संस्थानों पर वाशिंगटन के भारी लाभ को भी ध्यान में रखना होगा।

सांसदों को जानकारी देते हुए, नीति निमार्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि चीन लंबे समय से पाकिस्तान का मित्र और सहयोगी रहा है, लेकिन आईएमएफ और एफएटीएफ के मामले में अमेरिका अभी भी महत्वपूर्ण है। इसलिए पाकिस्तान संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी आकलन के मुताबिक, अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) और अन्य माध्यमों से पाकिस्तान पर शिकंजा कस सकता है।

आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका भी पाकिस्तानी निर्यात पर रोक लगाने का सहारा ले सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान पहले से ही 6 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि वैश्विक ऋणदाता चाहते है कि देश पहले इसे पूरा करे। इसी तरह, कार्य योजना पर ठोस कार्यक्रम के बावजूद, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नीति निमार्ताओं को डर है कि अमेरिकी कांग्रेस अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका के लिए दंडित करने वाले नए कानून ला सकती है।

लेकिन अफगानिस्तान से अपनी वापसी के बाद से अमेरिका की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है और वह एक बार फिर पाकिस्तान को छोड़ने पर विचार कर रहा है।

पिछले महीने, जब अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमेन ने पाकिस्तान और भारत दोनों का दौरा किया था, तो उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन को भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाले दिनों में वापस जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। और इस्लामाबाद की उनकी यात्रा केवल विशिष्ट और संकीर्ण उद्देश्य के लिए है।

भारत की अपनी दो दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन मुंबई में एक कार्यक्रम में बोल रही शेरमेन ने यह भी कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा विशेष कारणों के लिए थी और इसका मतलब एक बार फिर से व्यापक संबंधों के पुनर्निर्माण के लिए नहीं है।

एक पश्चिमी राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर बोलते हुए कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा दिए गए कुछ बयानों से पाकिस्तान को मदद नहीं मिली। इससे अमेरिका में गलत संदेश गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घावों पर नमक लगाने की कोई जरूरत नहीं थी।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 15 Nov 2021, 05:15:01 PM

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