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अफगानिस्तान पर नजर रखना नहीं छोड़ेगा अमेरिका, रूसी ठिकानों का करेगा इस्तेमाल

आतंकवाद के खिलाफ अपने युद्ध में अमेरिका (America) तालिबान के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मध्य एशिया में रूस (Russia) के ठिकानों का इस्तेमाल कर सकता है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 01 Oct 2021, 09:24:24 AM
Russia

किर्गिस्तान में अपनै सैन्य ठिकाने को और आधुनिक कर रहा है रूस. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • अमेरिका मध्य एशिया में रूस के ठिकानों का करेगा इस्तेमाल
  • निशाने पर होंगे अफगानिस्तान में अल कायदा और आईएस
  • रूस ने की थी अमेरिका को यह पेशकश, तालिबान पर भी शिकंजा

वॉशिंगटन:

आतंकवाद के खिलाफ अपने युद्ध में अमेरिका (America) तालिबान के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मध्य एशिया में रूस (Russia) के ठिकानों का इस्तेमाल कर सकता है. एशिया में रूसी ठिकानों से अमेरिका अफगानिस्तान के उन इलाकों को निशाना बनाएगा जहां आईएसआईएस-के (ISIS-K) और अल कायदा (Al-Qaeda) जैसे आतंकवादी समूह अभी भी सक्रिय हैं. इसके लिए अमेरिका उन देशों के साथ बातचीत कर रहा है जो अफगानिस्तान (Afghanistan) की सीमा पर क्षितिज के ऊपर आतंकवाद विरोधी अभियानों के बारे में बात कर रहे हैं, जो अमेरिकी सेना को तालिबान-नियंत्रित राष्ट्र में अधिक आसानी से सर्वेक्षण करने और लक्ष्य पर हमला करने की अनुमति देगा. अमेरिकी समाचार पोर्टल पोलिटिको ने सीनेटरों का हवाला देते हुए रिपोर्ट किया है जो एक में शामिल हुए थे. इस सप्ताह पेंटागन के नेताओं के साथ वगीर्कृत सुनवाई. उन्होंने कहा कि उन साइटों में उन देशों में रूस द्वारा चलाए जा रहे ठिकाने शामिल हो सकते हैं.

सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष सार्वजनिक रूप से गवाही देने के बाद सेना के शीर्ष अधिकारियों की तिकड़ी ने बंद दरवाजों के पीछे सांसदों को ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और अन्य की सरकारों के साथ होने वाली चर्चाओं के बारे में जानकारी दी, सीनेटरों ने पोलिटिको को बताया. सांसदों के सामने यह खुलासा रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने स्वीकार किया कि अमेरिका ने रूस से मध्य एशिया में रूसी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी आतंकवाद विरोधी अभियानों की मेजबानी करने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक प्रस्ताव के बारे में 'स्पष्टीकरण' के लिए कहा है.

इंडिया नैरेटिव ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि रूस ने अमेरिका को इस क्षेत्र में अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग करने की पेशकश की थी. मॉस्को भी मध्य एशियाई गणराज्यों में फैल रहे आतंकवाद से चिंतित है, जिसके साथ रूस सीमा साझा करता है. ये देश अफगानिस्तान के खिलाफ रूस के लिए एक बफर भी बनाते हैं. वर्गीकृत सत्र के दौरान  सांसदों ने सीनेटरों को बताया गया कि उस विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. यूएस सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंजी ने विशिष्ट प्रकार के विमानों और लॉन्चिंग पॉइंट्स के बारे में विस्तार से बताया, जिनका उपयोग अफगानिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जा सकता है.

सीनेटरों ने ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने भी सीनेटरों को अपने रूसी समकक्ष वालेरी गेरासिमोव के साथ बातचीत की प्रकृति के बारे में बताया. पोलिटिको की रिपोर्ट में सीनेट के सशस्त्र सेवा अध्यक्ष जैक रीड के हवाले से कहा गया है, 'यह उनका क्षेत्र है, लेकिन मुझे लगता है वास्तव में रूस का वहां प्रभाव है और इसलिए रूस के पास वीटो नहीं हो सकता है, लेकिन उनका निश्चित रूप से प्रभाव है तो आपको उनसे बात करनी है.' अमेरिका ने तालिबान के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में खाड़ी देशों में अपने ठिकानों से दो ड्रोन हमले किए हैं. हालांकि इन्हें कुशल कार्रवाई के लिए बहुत दूर माना जाता है, क्योंकि ड्रोन की उड़ान अवधि क्षमता का अधिकांश हिस्सा स्ट्राइक जोन में उड़ान भरने और फिर वापस बेस पर बर्बाद हो जाता है.

First Published : 01 Oct 2021, 09:19:00 AM

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