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26/11 Special: आतंकवाद पर अमेरिकी कार्रवाई में राना को फैसले का इंतजार

एक है मेजर इकबाल, जिसने कथित तौर पर 26/11 हमले की योजना बनाई थी. आरएफजे के अनुसार हमलावरों का कथित प्रशिक्षक अबू काहाफा और लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मजहर इकबाल उर्फ अबू अल-कमा है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 26 Nov 2021, 02:48:01 PM
Mumbai Attack

मुंबई पर आतंकी हमले की 13वीं बरसी आज. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले की 13वीं बरसी आज

राना के प्रत्यर्पण का है इंतजार, फिलहाल अमेरिकी जेल में

  • भगौड़े आतंकी साजिद मीर पर है 50 लख डॉलर का इनाम

न्यूयॉर्क:

मुंबई में 26/11 के आतंकवादी हमले की 13वीं बरसी के आसपास पाकिस्तानी कनाडाई तहव्वुर हुसैन राना भारत के प्रत्यर्पण पर फैसले के इंतजार में हिरासत में है. अन्य चार पर भी आरोप लगाया गया है. ये राना के कथित सहयोगी हैं और इनके नाम अमेरिकी सरकार की वांछित सूची में हैं. कैदी संख्या 22829-424 राना को लॉस एंजिल्स मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा जा रहा है, बुधवार को ब्यूरो ऑफ प्रिजन डेटाबेस पर एक चेक दिखाया गया. राना के बचपन का दोस्त पाकिस्तानी-अमेरिकी दाउद सैयद गिलानी उर्फ डेविड कोलमैन हेडली मुंबई हमलों में मदद करने के आरोप में एक संघीय न्यायाधीश द्वारा दोषी ठहराया गया और वह 35 साल की सजा काट रहा है. उसने जेल में अधिकतम उम्रकैद की सजा से बचने के लिए वह सरकारी गवाह बन गया और राना के खिलाफ गवाही दी.

उसे भारत में एक सरकारी गवाह भी घोषित किया गया था और मुंबई सत्र अदालत ने उसे 2015 में क्षमा कर दिया और उसे अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में स्वीकार कर लिया. राना की कथित मदद से उसे भारत के लिए एक व्यापार वीजा मिला. उसने उन आतंकी हमलों की निगरानी की, जिनमें छह अमेरिकियों सहित 170 से अधिक लोग मारे गए थे. लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का साजिद मीर, जिसे 2008 के हमले के सिलसिले में शिकागो की एक संघीय अदालत में आरोपित किया गया था, एफबीआई की मोस्ट वांटेड आतंकवादी सूची में एक भगोड़ा है और उस पर 50 लाख डॉलर का इनाम है.

स्टेट डिपार्टमेंट्स रिवार्डस फॉर जस्टिस (आरएफजे) एक आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम है, जिसके तहत आतंकवादियों को पकड़ने वालों को इनाम दिया जाता है. इसकी ओर से कहा गया है कि साजिद मीर ने डेविड हेडली और अन्य लोगों के लिए एक 'हैंडलर' के रूप में कार्य किया. उसे लश्कर-ए-तैयबा की ओर से आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की योजना बनाने और तैयारी से संबंधित कार्यो को पूरा करने का निर्देश दिया गया था. उसके साथ मामले में आरोपित तीन अन्य लोग भी आरएफजे की सूची में हैं.

एक है मेजर इकबाल, जिसने कथित तौर पर 26/11 हमले की योजना बनाई थी. आरएफजे के अनुसार हमलावरों का कथित प्रशिक्षक अबू काहाफा और लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मजहर इकबाल उर्फ अबू अल-कमा है. चारों पाकिस्तान के निवासी हैं. राना को शिकागो में एक संघीय मुकदमे में 26/11 हमले के लिए सामग्री देने के आरोप से बरी कर दिया गया था, लेकिन लश्कर की मदद करने और डेनिश अखबार के खिलाफ एक आतंकवादी साजिश में भाग लेने के लिए दोषी ठहराया गया था और 2013 में उसे 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी.

उसे कोविड-19 महामारी के कारण अनुकंपा के आधार पर अस्थायी रूप से रिहा कर दिया गया था, लेकिन भारत से प्रत्यर्पण अनुरोध के संबंध में पिछले साल जून में एक संघीय अदालत के वारंट पर तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था और अभी भी हिरासत में है. लॉस एंजिल्स में फेडरल मजिस्ट्रेट जज जैकलीन चुलजियान ने सरकार और बचाव पक्ष को 15 जुलाई से पहले अपनी-अपनी दलीलों का समर्थन करने वाले दस्तावेज दाखिल करने का आदेश दिया. राना के वकीलों ने अपनी फाइलिंग में कहा कि मुंबई हमले में उसे फंसाने के लिए हेडली की गवाही विश्वसनीय नहीं थी, क्योंकि वह एक सरकारी गवाह था और चूंकि उसे शिकागो की अदालत द्वारा 26/11 से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया गया था, इसलिए उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता था.

सरकार ने अपनी फाइलिंग में कहा कि राना और उसके साथी ने आव्रजन और यात्रा व्यवसाय में एक भारतीय वीजा के लिए फर्जी दस्तावेज दाखिल किए, जिस आधार पर गिलानी को एशियाई क्षेत्र में हमारे संचालन की निगरानी और परामर्श करने वाला क्षेत्रीय प्रबंधक बनाया गया, ताकि वह भारत में काम कर सके. गिलानी ने उस कवर का इस्तेमाल मुंबई में हमलों को अंजाम देने खातिर लश्कर-ए-तैयबा के लिए खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया था. सरकार ने कहा कि गिलानी ने राना को उसकी गतिविधियों से अवगत कराया और उसे इस बात की जानकारी हो गई कि आतंकवादी कैसे मुंबई में किन जगहों पर हमला करने जा रहे हैं, जिसमें बहुत से लोग मारे जाएंगे, लेकिन उसने खुद को साजिशकर्ताओं से दूर नहीं किया.

सरकारी वकीलों द्वारा आखिरी फाइलिंग 21 जुलाई को की गई थी. रक्षा दस्तावेज में एक बिंदु के बारे में तकनीकी तर्क देते हुए कहा गया था कि यह अदालत द्वारा निर्धारित 'दायरे से परे' है. कोविड-19 महामारी के कारण अदालत में सीधी सुनवाई को सीमित कर दिया गया, जिससे प्रत्यर्पण मामले की प्रगति में बाधा उत्पन्न हुई. सरकार के अदालती दस्तावेजों के अनुसार राना और गिलानी ने हसन अब्दाल स्थित कैडेट कॉलेज में क्वार्टर साझा किए थे और जीवन भर दोस्त बने रहे. राना कप्तान के पद तक पहुंचने के लिए पाकिस्तानी सेना का डॉक्टर बन गया, लेकिन बाद में कनाडा में आकर बस गया. कनाडा के नागरिक बनने के बाद वह शिकागो चला गया और वहां उसने यात्रा और आव्रजन व्यवसाय चलाया. मीडिया की खबरों के मुताबिक गिलानी पर 2018 में शिकागो क्षेत्र की संघीय जेल में हमला किया गया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

First Published : 26 Nov 2021, 08:51:51 AM

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