मिडिल ईस्ट में युद्ध की उलटी गिनती! क्या आमने-सामने हैं ईरान, इजराइल और अमेरिका?

US Plan to Attack On Iran: न्यूक्लियर डील को लेकर नए दावे, सऊदी अरब को अमेरिकी मदद और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता तनाव. जानिए मिडिल ईस्ट में जंग के हालात पर पूरी रिपोर्ट.

US Plan to Attack On Iran: न्यूक्लियर डील को लेकर नए दावे, सऊदी अरब को अमेरिकी मदद और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता तनाव. जानिए मिडिल ईस्ट में जंग के हालात पर पूरी रिपोर्ट.

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Yashodhan Sharma
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सांकेतिक तस्वीर

US Plan to Attack On Iran: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच न्यूक्लियर सहयोग को लेकर कुछ दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें यह संकेत मिलता है कि अमेरिका सऊदी अरब को परमाणु क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है. यह मामला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है और उस पर प्रतिबंध भी लगाता रहा है. ऐसे में आलोचक इसे अमेरिका की दोहरी नीति बता रहे हैं.

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लेबनान बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई

दूसरी ओर, क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है. इजराइल और अमेरिका ने संभावित हमले की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल में रिजर्व फोर्स को अलर्ट पर रखा गया है, छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उत्तरी सीमा, खासकर लेबनान बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है. माना जा रहा है कि इजराइल को आशंका है कि ईरान अपने सहयोगी संगठन हिजबुल्ला के जरिए उत्तरी मोर्चे से हमला करवा सकता है.

अमेरिकी बेस पहले से सक्रिय

तेल अवीव सहित कई बड़े शहरों में बम शेल्टर की पहचान के लिए नए संकेतक लगाए जा रहे हैं. नागरिकों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है. इजराइली डिफेंस फोर्स ने 'डूम प्रोटोकॉल' जैसे आपातकालीन सुरक्षा उपाय सक्रिय कर दिए हैं. वहीं, अमेरिका ने भी मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा दी है. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी बेस पहले से ही सक्रिय हैं, हालांकि कतर और यूएई ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे अपनी जमीन से किसी हमले की अनुमति नहीं देंगे.

बढ़ सकता है फुल स्केल वॉर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात काबू में नहीं आए तो क्षेत्र फुल-स्केल वॉर की ओर बढ़ सकता है. 2003 के इराक युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा माना जा रहा है. स्थिति इतनी संवेदनशील है कि किसी भी छोटी घटना से व्यापक युद्ध भड़क सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं.

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