अमेरिका के बाद मैक्सिको ने भारत पर लगाया 50 फीसदी टैरिफ, जानें कब से होगा लागू

मैक्सिको ने 2026 से उन देशों के लिए 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिनसे उसका कोई व्यापारिक समझौता नहीं है. इसका सबसे बड़ा असर भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों पर पड़ेगा.

मैक्सिको ने 2026 से उन देशों के लिए 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिनसे उसका कोई व्यापारिक समझौता नहीं है. इसका सबसे बड़ा असर भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों पर पड़ेगा.

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Ravi Prashant
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मैक्सिको ने लगाए भारी टैरिफ Photograph: (Freepik)

मैक्सिको सरकार ने बुधवार को उन देशों से आयात होने वाले सैकड़ों उत्पादों पर बड़े पैमाने पर टैरिफ बढ़ाने को मंजूरी दे दी है, जिनके साथ मैक्सिको का कोई औपचारिक व्यापारिक समझौता नहीं है. इस लिस्ट में भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई निर्यातक देशों के नाम भी शामिल हैं. राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम की सरकार का कहना है कि यह कदम स्थानीय रोजगार और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक था. सीनेट में पेश किए गए इस विधेयक के पक्ष में 76 वोट पड़े जबकि विरोध में केवल 5 वोट मिले.

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1,400 से अधिक उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत 1,400 से अधिक उत्पादों पर टैरिफ को कई मामलों में 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है. यह बदलाव 2026 से लागू होगा. यह टैरिफ विशेष रूप से उन देशों के लिए है जिनके साथ मैक्सिको का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है. इस सूची में भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया विशेष रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल हैं.

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को सबसे बड़ा झटका

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता वाहन निर्यात पर पड़ने वाला असर है. मैक्सिको भारत का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्यात गंतव्य है और यहां लगभग 1.8 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय वाहनों का वार्षिक निर्यात होता है. Hyundai और Volkswagen जैसे प्रमुख कार निर्यातकों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा. स्कोडा ऑटो वोक्सवैगन इंडिया के प्रमुख पियूष अरोड़ा ने कहा कि भारत कई वर्षों से वैश्विक वाहन निर्यात का एक मजबूत आधार रहा है और कंपनी 40 से अधिक देशों में निर्यात करती है.

अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा असर

वाहन उद्योग के अलावा इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स, अल्यूमिनियम और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ेगा. 2025 में भारत ने मैक्सिको को कुल 5.63 अरब डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया था, जिसमें वाहनों का हिस्सा सबसे बड़ा था. व्यापारिक समूहों ने इस टैरिफ वृद्धि का तीखा विरोध किया है और भारतीय पक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि इस निर्णय के प्रभाव को कम किया जा सके.

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स्थानीय उद्योग संरक्षण के नाम पर बढ़ा कदम

मैक्सिको सरकार का तर्क है कि उच्च टैरिफ लगाने से घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से कुछ राहत मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और आयातित उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि देखने को मिल सकती है.

आगे की चुनौती क्या है? 

अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भारत और अन्य प्रभावित देश मैक्सिको के साथ बातचीत करके इस टैरिफ व्यवस्था में कोई ढील दिला पाएंगे या नहीं. उद्योग जगत का मानना है कि अगर टैरिफ व्यवस्था इसी रूप में लागू रही तो 2026 में वैश्विक ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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