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मार्को रुबियो Photograph: (ani)
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दुनिया भर की नजरें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पर टिकी थीं. रुबियो ने अपने भाषण और इंटरव्यू में यूरोप के साथ दोस्ती को तो जरूरी बताया, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि साझा संस्कृति और सभ्यता ही हमें जोड़ती है और यूरोप को इसे बचाना होगा.
साझा सभ्यता और विरासत की याद
रुबियो ने यूरोप के नेताओं को याद दिलाया कि अमेरिका और यूरोप एक ही महान सभ्यता की संतान हैं. उन्होंने कला से लेकर संगीत (जैसे रोलिंग स्टोन्स) और यहां तक कि बीयर का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे रिश्ते बहुत गहरे हैं लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि यूरोप को "गिरावट" से बाहर निकलना होगा. सामूहिक प्रवासन (माइग्रेशन) से समाज की एकता को खतरा है. ईसाई धर्म, साझा इतिहास और भाषा ही हमारी असली ताकत हैं.
गठबंधन में बदलाव की जरूरत
रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब सिर्फ देखभाल करने वाला बनकर नहीं रहना चाहता. उन्होंने कहा, "जब हम कड़े फैसले लेने के लिए दबाव डालते हैं, तो इसलिए क्योंकि हमें परवाह है." उनका इशारा यूरोप की अपनी सुरक्षा के प्रति ढीले रवैये की ओर था.
यूक्रेन और ईरान पर बड़ा बयान
इंटरव्यू के दौरान रुबियो ने कई अहम बातें कहीं. रुबियो का मानना है कि पुतिन अब सिर्फ डोनबास के बाकी बचे हिस्से (करीब 20%) पर कब्जा करना चाहते हैं. उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी से भी मिलने को तैयार हैं. अगर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई मिलना चाहें, तो ट्रंप उनसे मुलाकात कर सकते हैं ताकि दुनिया की समस्याओं का समाधान निकले.
कैसी रही प्रतिक्रिया?
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने भी सुरक्षा और आजादी को लेकर यूरोप की एकजुटता पर जोर दिया. सम्मेलन के अध्यक्ष ने रुबियो के भाषण के बाद राहत की सांस ली, लेकिन यूरोप के कुछ अन्य नेता इतने खुश नहीं दिखे. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कुछ सीमाएं पार हो चुकी हैं जिन्हें अब बदला नहीं जा सकता.
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