खामेनेई का ब्रह्मास्त्र और खूंखार कमांडर इस्माइल कानी एक्टिव, टेंशन में इजरायल और अमेरिका

अमेरिका ने ईरान के इस खूंखार कमांडर को कई बार मारने की कोशिश की गई. मगर वह हर बार बच निकला.

अमेरिका ने ईरान के इस खूंखार कमांडर को कई बार मारने की कोशिश की गई. मगर वह हर बार बच निकला.

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Mohit Saxena
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Esmail Qaani

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के ब्रह्मास्त्र कहे जाने वाले खूंखार कमांडर इस्माइल कानी की गतिविधियों ने इजरायल और अमेरिका को चिंता में डाल दिया है. खामेनेई ने हाल ही में कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच सहयोग तभी संभव है जब अमेरिका इजरायल का समर्थन बंद कर दे. मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त करे. ईरान के इस खूंखार कमांडर को कई बार मारने की कोशिश की गई. मगर वह हर बार बच निकला. 

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ईरान के विरोधियों के खिलाफ हमलों की साजिश

आपको बता दें कि इस्माइल कानी ईरान की कुद्स फोर्स की कमान संभालते हैं. वे ईरान की सैन्य शाखा में है. वह विदेशी अभियानों को लेकर जिम्मेदार हैं. उनकी गतिविधियों ने इजरायल और अमेरिका को चिंता में डाल दिया है. कानी अब ईरान के विरोधियों के खिलाफ हमलों की साजिश रच रहे हैं. ईरान और इजरायल के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है. दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ हमले किए हैं.  इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने की धमकी दी है, वहीं ईरान ने इजरायल को नष्ट करने की धमकी दी है.

अमेरिका को कुचलने की योजना बना रहा

खामेनेई के लिए इस्माइल कानी एक ऐसा हथियार है, जिससे CIA और मोसाद भी कतराते हैं. कानी इतना बड़ा रहस्य है कि उसकी जिंदगी और मौत पर काफी सस्सपेंस बना हुआ है. 2025 के जून में  हुए हमलों में अमेरिका ने उसकी मौत की खबरें खूब फैलाई थीं, मगर 24 जून 2025 को तेहरान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के वीडियो में कानी जिंदा खड़ा दिखाई दिया. अब जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स की माने तो वह जिंदा है. इसके साथ ईरान की युद्ध रणनीति में अमेरिका को कुचलने की योजना बना रहा है. 

ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद जब ट्रंप ने सोचा था कि कुद्स फोर्स का खात्मा हो चुका है. तब कानी ने कमान संभाली और अमेरिका को परेशान करना शुरू कर दिया. 

कानी का ‘डेथ वारंट’

माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जब ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी दी है तो इस्माइल कानी ने कथित तौर पर अपनी ‘आत्मघाती ब्रिगेड’ को सक्रिय कर दिया है. जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका ने पहली गोली चलाई, तो कानी का पहला टारगेट मिडिल ईस्ट में मौजूद हर वो अमेरिकी नागरिक होगा जो उनकी रेंज में है.

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