Japan Election: जापान में आज मध्यावधि संसदीय चुनाव, महंगाई मुख्य मुद्दा; क्या प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को मिलेगा जनादेश?

Japan Election: जापान में मध्यावधि संसदीय चुनाव के बीच महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है. प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची जनादेश चाहती हैं, जबकि मतदाता बढ़ती कीमतों, घटती आय और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंता जता रहे हैं.

Japan Election: जापान में मध्यावधि संसदीय चुनाव के बीच महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है. प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची जनादेश चाहती हैं, जबकि मतदाता बढ़ती कीमतों, घटती आय और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंता जता रहे हैं.

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Deepak Kumar
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Japan Election: आज (8 फरवरी) जापान में मध्यावधि संसदीय चुनाव हो रहा है. प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने जनता का समर्थन हासिल करने के लिए यह चुनाव बुलाया है. जापान के लाखों वोटरों के लिए सबसे बड़ी चिंता बढ़ती महंगाई बनी हुई है, क्योंकि घर चलाना कठिन हो गया है और सैलरी महंगाई के मुकाबले धीरे-धीरे बढ़ रही है.

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किन पार्टियों के बीच है मुकाबला और क्या हैं मुद्दे?

मुख्य मुकाबला प्रधानमंत्री ताकाइची के नेतृत्व वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) और नए बने सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस के बीच है. महंगाई, रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतें और लोगों की खरीदने की क्षमता इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन चुके हैं. पिछले एक साल में एडजस्ट की गई मजदूरी में गिरावट आई है, क्योंकि वे बढ़ती कीमतों के हिसाब से नहीं बढ़ पाई हैं.

महंगाई दर 2-3% के बीच है, लेकिन खाने-पीने की वस्तुओं खासकर चावल की कीमतों में बहुत वृद्धि हुई है. 2023 में खराब फसल और अन्य कारणों से चावल लगभग 68% महंगा हुआ. इसके अलावा कॉफी और चॉकलेट जैसी इम्पोर्टेड चीजें भी महंगी हो गई हैं. इससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा है.

सर्वे के अनुसार आम लोगों की क्या है परेशानी?

एक सर्वे में 45% लोगों ने कहा कि कीमतों को नियंत्रित करना उनके वोट का सबसे प्रमुख आधार है. टोक्यो की सोफिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोइची नाकानो के अनुसार बिना इनकम में बढ़ोतरी के कीमतें बढ़ने से लोगों को रोजमर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल हो रहा है. जापान की तेजी से बूढ़ी होती आबादी और भारी सरकारी कर्ज (लगभग 230% जीडीपी) की वजह से कुछ आर्थिक योजनाओं पर सवाल भी उठ रहे हैं.

पीएम ताकाइची का चुनावी वादा

प्रधानमंत्री ताकाइची ने वादा किया है कि अगर वह फिर से चुनी जाती हैं, तो खाने-पीने की वस्तुओं और बिना अल्कोहल वाले ड्रिंक्स पर आठ प्रतिशत उपभोग-कर दो साल के लिए हटाया जाएगा. यह वादा कोविड-19 के बाद मंजूर 21.3 ट्रिलियन येन के बड़े आर्थिक पैकेज का हिस्सा है.

वोटर अभी भी आशंकित हैं और कुछ ने कहा है कि बार-बार वही राजनीतिक चेहरे बदलाव के बिना परेशान कर रहे हैं. क्योटो न्यूज के अनुसार, एलडीपी को 233 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है, जो पिछले चुनाव से ज्यादा है. वहीं, विपक्षी गठबंधन के लिए स्थिति मुश्किल है. ऐसे में ताकाइची को उम्मीद है कि इस चुनाव से उन्हें नया जनादेश मिलेगा.

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