गाजा निगरानी नीति बना विवाद की वजह, इजराइल ने अमेरिका के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति; जानिए पूरा मामला

गाजा की निगरानी को लेकर अमेरिका की नई नीति पर इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है. इजरायल ने समिति गठन में शामिल न किए जाने को अपनी नीति के खिलाफ बताया और अमेरिका से स्पष्टीकरण मांगा है.

गाजा की निगरानी को लेकर अमेरिका की नई नीति पर इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है. इजरायल ने समिति गठन में शामिल न किए जाने को अपनी नीति के खिलाफ बताया और अमेरिका से स्पष्टीकरण मांगा है.

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Deepak Kumar
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Donald Trump and Benjamin Netanyahu

गाजा को लेकर अमेरिका द्वारा बनाई गई नई निगरानी नीति पर इजरायल ने कड़ा विरोध जताया है. इजरायल का कहना है कि यह नीति उसकी रणनीति और नीतियों के खिलाफ है. खास तौर पर गाजा में आगे की कार्रवाई की निगरानी के लिए बनाई गई कार्यकारी समिति को लेकर इजरायल असंतुष्ट है.

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इजरायल की नाराजगी का कारण

इजरायल सरकार ने कहा कि गाजा कार्यकारी समिति के गठन से पहले उससे कोई बातचीत या समन्वय नहीं किया गया. इजरायल, अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद इस फैसले में उसे नजरअंदाज किया गया. शनिवार (17 जनवरी) को जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्रालय को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस मुद्दे पर बात करने के निर्देश दिए हैं.

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को जिस समिति की घोषणा की, उसमें कोई भी इजरायली सरकारी अधिकारी शामिल नहीं है. हालांकि, इजरायल के एक कारोबारी को समिति में जगह दी गई है. समिति के अन्य सदस्यों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो करीबी सहयोगी, ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक अमेरिकी जनरल और पश्चिम एशिया के कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

गाजा को लेकर ट्रंप प्रशासन की योजना

ट्रंप प्रशासन पहले ही कह चुका है कि गाजा को लेकर अमेरिका की युद्धविराम योजना अब अपने दूसरे और ज्यादा चुनौतीपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है. इस योजना के तहत गाजा में कुछ इलाकों में अमेरिकी निगरानी रहेगी, जबकि वहां का प्रशासन एक फिलिस्तीनी समिति संभालेगी. इस फिलिस्तीनी समिति की कमान अली शात को सौंपी गई है, जो पेशे से इंजीनियर हैं और फिलिस्तीनी प्राधिकरण में पहले अधिकारी रह चुके हैं. योजना के अनुसार, समिति की निगरानी ट्रंप के नेतृत्व वाले “बोर्ड ऑफ पीस” द्वारा की जाएगी.

अमेरिका की पहल पर गठित फिलिस्तीनी समिति की पहली बैठक शुक्रवार (16 जनवरी) को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई. बैठक में अली शात ने हालात सुधारने के लिए तेजी से काम करने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि गाजा के पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापन में करीब तीन साल का समय लग सकता है.

यह भी पढ़ें- गाजा में शांति के लिए ट्रंप का बड़ा कदम, 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन, प्रेसिडेंट खुद संभालेंगे कमान

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