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File Photo
इस्राइल और हमास के बीच शांति समझौता हो चुका है. दोनों पक्षों ने युद्ध भी रोक दिया है. लेकिन इसी बीच इस्राइली सेना और इस्राइली सुरक्षा एजेंसी ने एक संयुक्त सैन्य अभियान लॉन्च किया. अभियान के तहत सेना ने हमास कमांडर मोहम्मद अल-हबील और इस्लामिक जिहाद के अली राजियाना को मार गिराया.
जानें क्यों दोनों को मारा
अल-हबील पर इस्राइली सेना के नोआ मार्सियानो की कैद में बेरहमी से हत्या करने का आरोप था. वहीं, राजियाना उत्तरी गाजा ब्रिगेड में इस्लामिक जिहाद का मुख्य कमांडर था. अली राजियाना सिर्फ आतंकियों की तैनाती और संगठन की सुरक्षा के लिए ही जिम्मेदार नहीं था, बल्कि पूरे युद्ध के दौरान इस्राइली बंधकों की निगरानी करने का भी जिम्मा संभाल रहा था.
इस्राइली सेना ने क्या कहा
IDF की मानें तो उन्होंने ये एयरस्ट्राइक सीजफायर के उल्लंघन के वजह से की है. नोआ मार्सियानो को सात अक्टूबर के हमले में नाहल ओज पोस्ट से अगवा किया गया था. वे एक ऑब्जर्वर के रूप में तैनात थीं. कैद में रहने के दौरान उनकी हत्या हुई, जिससे इस्राइल में भारी आक्रोश पैदा हो गया.
इस्राइल की सेना ने सोशल मीडिया पर इसके खात्मे की पुष्टि की. सेना ने कहा कि इस कार्रवाई से मार्सियानो परिवार को न्याय मिला है. इस्राइल ने साफ कर दिया है कि उनके नागरिकों और सैनिकों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा.
23 फलस्तीनी नागरिकों की मौत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल ने अपने हालिया हमलों में सिर्फ हबील और राजियाना को ही नहीं मारा बल्कि उसके हमले में करीब 23 फलस्तीनी नागरिकों की भी मौत हो गई है. इस्राइल के इस हमले को युद्धविराम के बाद सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है. बुधवार को मरने वाले लोगों में कई बच्चे भी शामिल थे, जिसमें एक तो 11 साल की लड़की भी थी.
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