आखिर श्रीलंका के पास क्या कर रहा था ईरानी युद्धपोत ‘आइरिस देना’, जो हमले में हुआ तबाह

विशाखापट्टनम में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा ईरान का आधुनिक युद्धपोत ‘आइरिस देना’ श्रीलंका के गाले तट के पास हादसे का शिकार हो गया। जहाज पर 180 क्रू मेंबर थे, जिनमें से कई लापता बताए जा रहे हैं और बचाव अभियान जारी है.

विशाखापट्टनम में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा ईरान का आधुनिक युद्धपोत ‘आइरिस देना’ श्रीलंका के गाले तट के पास हादसे का शिकार हो गया। जहाज पर 180 क्रू मेंबर थे, जिनमें से कई लापता बताए जा रहे हैं और बचाव अभियान जारी है.

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Ravi Prashant
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IRIS Dena warship

आइरिस देना Photograph: (x/@AdityaRajKaul)

विशाखापट्टनम में आयोजित 'इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026' में हिस्सा लेने के बाद घर लौट रहा ईरानी जंगी जहाज 'आइरिस देना' (IRIS Dena) हादसे का शिकार हो गया है. श्रीलंका के तट के पास हुए इस वाकये ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि कुछ दिन पहले तक जो जहाज दोस्ती का संदेश दे रहा था, वह अब गहरे समंदर में समा चुका है.

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शांति के मिशन से युद्ध के बीच फंसा जहाज

अभी 16 फरवरी की ही बात है, जब ईरानी फ्रिगेट 'आइरिस देना' भारत के विशाखापट्टनम बंदरगाह पर शान से खड़ा था. मौका था इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का, जिसमें दुनिया के 74 देशों ने हिस्सा लिया था. ऑस्ट्रेलिया, जापान, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के युद्धपोत भी वहां मौजूद थे. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बेड़े का निरीक्षण किया और 'यूनाइटेड थ्रू ओशन्स' (समुद्र के जरिए एकता) के संदेश के साथ इस आयोजन की शुरुआत हुई.

ईरानी नौसेना के कमांडर एडमिरल शहरम ईरानी ने भारतीय नौसेना प्रमुख से मुलाकात भी की थी. लेकिन जैसे ही यह अभ्यास 25 फरवरी को खत्म हुआ, हालात पूरी तरह बदल गए. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू कर दिया और 'आइरिस देना' अपने घर लौटते वक्त युद्ध की आग के बीच फंस गया.

गाले के तट पर सुबह 5 बजे की वो चीख

आज सुबह लगभग 5:08 बजे, श्रीलंका के गाले तट से 40 समुद्री मील दूर 'आइरिस देना' से मदद की आखिरी गुहार (Distress Call) सुनी गई. 180 क्रू मेंबर्स वाला यह आधुनिक जहाज डूब रहा था. खबर मिलते ही श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद को बताया कि दो नौसैनिक जहाज और एक विमान को तुरंत बचाव के लिए रवाना किया गया है.

अब तक की जानकारी के मुताबिक, 30 नाविकों को बचाकर गाले के करापिटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में घायलों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग दावे किए जा रहे हैं. कुछ खबरों के अनुसार 101 नाविक अब भी लापता हैं, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं.

हमला या हादसा? संसद में उठे बड़े सवाल

इस जहाज के डूबने का असली कारण अभी तक साफ नहीं हो पाया है. श्रीलंका की संसद में विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या इस जहाज पर अमेरिका या इजरायल द्वारा बमबारी की गई है? सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई सीधा जवाब नहीं आया है.

कुछ सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह एक पनडुब्बी हमला (Submarine Attack) हो सकता है, क्योंकि जहाज के निचले हिस्से पर जोरदार धमाका हुआ था. वहीं कुछ रिपोर्ट्स इसे तकनीकी खराबी या जहाज के जमीन से टकराने (Aground) का नतीजा बता रही हैं. अमेरिका की तरफ से भी इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

ईरान की समुद्री ताकत को बड़ा झटका

'आइरिस देना' कोई साधारण नाव नहीं थी. यह ईरान के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में से एक था, जो एंटी-शिप मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था. यह ईरान का पहला ऐसा जहाज था जिसमें वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम लगा हुआ था. इस जहाज ने पूरी दुनिया का चक्कर लगाने जैसे बड़े मिशन भी पूरे किए थे। ऐसे आधुनिक जहाज का इस तरह डूब जाना ईरान की नौसेना के लिए बहुत बड़ा नुकसान है.

हिंद महासागर में बढ़ता युद्ध का खतरा

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले श्रीलंका के जो जहाज (SLNS नंदिमित्रा और SLNS सागरा) विशाखापट्टनम में इस ईरानी जहाज के बगल में खड़े थे, आज वही श्रीलंकाई नाविक ईरानी नाविकों को समंदर से बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

अगर यह वाकई में कोई हमला है, तो इसका मतलब है कि युद्ध अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गया है. यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. जिस फ्लीट रिव्यू का मकसद 'समुद्र के जरिए जुड़ना' था, आज उसी समुद्र की लहरों में 101 नाविक अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.

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