श्रीलंका के पास ईरानी जंगी जहाज ‘आइरिस देना’ पर खतरनाक हमला, 100 से ज्यादा लोग लापता

श्रीलंका के गाले तट के पास ईरान के आधुनिक युद्धपोत ‘आइरिस देना’ पर कथित पनडुब्बी हमला होने की खबर से हिंद महासागर में हलचल मच गई है। जहाज पर मौजूद 180 क्रू में से 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कई घायल हैं और बचाव अभियान जारी है.

श्रीलंका के गाले तट के पास ईरान के आधुनिक युद्धपोत ‘आइरिस देना’ पर कथित पनडुब्बी हमला होने की खबर से हिंद महासागर में हलचल मच गई है। जहाज पर मौजूद 180 क्रू में से 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कई घायल हैं और बचाव अभियान जारी है.

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Ravi Prashant
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Iranian warship IRIS Dena

आइरिस देना Photograph: (X/@MarioNawfal)

ईरानी नौसेना के जंगी जहाज 'आइरिस देना' (Iris Dena) पर हुए हमले ने हिंद महासागर में खलबली मचा दी है. श्रीलंका के तट के पास हुए इस हादसे के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य जारी है. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? 

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श्रीलंका के पास ईरानी जहाज पर बड़ा हमला

ईरान का एक बेहद आधुनिक जंगी जहाज 'आइरिस देना' श्रीलंका के गाले (Galle) शहर के तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर डूबने लगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज पर पनडुब्बी (Submarine) से हमला किया गया था, जिसके बाद जहाज से मदद की गुहार (Distress Call) भेजी गई. यह इलाका श्रीलंका की समुद्री सीमा के ठीक बाहर है. जैसे ही इस हमले की खबर मिली, श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना तुरंत हरकत में आ गई. विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हादसे के बाद 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि कम से कम 78 लोग घायल हुए हैं.

बचाव कार्य में जुटी टीमें

जब यह हादसा हुआ, उस समय जहाज पर 180 लोगों का क्रू मौजूद था. सुबह तड़के जब जहाज में पानी भरना शुरू हुआ, तो अफरा-तफरी मच गई. श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद में जानकारी दी कि बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है. अब तक 30 घायल नाविकों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है. गाले के मुख्य अस्पताल को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि घायलों को तुरंत इलाज मिल सके. नौसेना और वायुसेना मिलकर लापता लोगों की तलाश कर रही है, लेकिन समुद्र की लहरों के बीच यह काम काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.

अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभा रहा है श्रीलंका

श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपत ने साफ किया है कि यह इलाका उनके 'सर्च एंड रेस्क्यू' (खोज और बचाव) क्षेत्र में आता है. अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत, जब भी कोई जहाज संकट में होता है, तो नजदीकी देश को उसकी मदद करनी होती है. श्रीलंका इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए अपने जहाजों और विमानों के जरिए ईरानी क्रू की जान बचाने में जुटा है. उप रक्षा मंत्री अरुणा जयसेकरा खुद इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं ताकि बाकी बचे हुए क्रू मेंबर्स को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.

तनावपूर्ण माहौल और युद्ध जैसी स्थिति

हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा गया है कि हमला किसने किया, लेकिन यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी एशिया (मिडल ईस्ट) में हालात बहुत खराब हैं. हाल ही में अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले हुए थे, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी. समुद्री रास्तों पर वर्चस्व की यह जंग अब खतरनाक मोड़ ले रही है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उनका 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर पूरा कंट्रोल है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर मिसाइल या ड्रोन हमले का खतरा हो सकता है.

ईरान के लिए बहुत बड़ा नुकसान

'आइरिस देना' ईरान के सबसे आधुनिक जंगी जहाजों में से एक था. इसे ईरान की समुद्री ताकत का प्रतीक माना जाता था. अगर यह जहाज पूरी तरह डूब जाता है, तो यह ईरानी नौसेना के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा.

एक तरफ ईरान अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाया है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना तेल के टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए तैयार है. ऐसे में इस जहाज का डूबना क्षेत्र में तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकता है.

क्या होगा आगे का असर?

इस हादसे ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स (व्यापारिक समुद्री रास्तों) की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हिंद महासागर में इस तरह का हमला यह बताता है कि युद्ध की आग अब दूर-दराज के समुद्री इलाकों तक फैल रही है. फिलहाल सबकी प्राथमिकता लापता नाविकों को ढूंढना और घायलों को सही इलाज देना है.

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