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सांकेतिक तस्वीर (NN)
ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा परमाणु विवाद अब एक नए मोड़ पर है. ईरान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ एक ऐसा परमाणु समझौता करना चाहता है जिससे दोनों देशों की जेब भरे. यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुरू होने वाली है. ईरानी विदेश मंत्रालय के अधिकारी हामिद कंबारी ने कहा कि समझौते को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए यह जरूरी है कि इसमें अमेरिका को भी उन क्षेत्रों में फायदा मिले जहां जल्दी पैसा कमाया जा सके.
क्या है ईरान का नया ऑफर?
ईरान ने बातचीत की मेज पर कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं. इनमें तेल और गैस के क्षेत्रों में मिलकर काम करना. वहीं, माइनिंग (खनन) में निवेश का मौका देना. अमेरिका से विमानों की खरीदारी भी है. ईरानी अधिकारियों का मानना है कि 2015 के पुराने समझौते में अमेरिका के आर्थिक हितों का ख्याल नहीं रखा गया था, इसलिए इस बार वे अमेरिका को भी फायदे में साझीदार बनाना चाहते हैं.
तनाव के बीच बातचीत
एक तरफ जहां बातचीत की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ तनाव भी कम नहीं है. अमेरिका ने इलाके में अपना दूसरा युद्धपोत (Aircraft Carrier) भेज दिया है और वह किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है. वहीं, अमेरिका की एक टीम, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शामिल हैं, मंगलवार को जेनेवा में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेगी.
ईरान का लचीला रुख
ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने संकेत दिया कि अगर उन पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटाई जाती हैं, तो वे अपने परमाणु कार्यक्रम में ढील देने को तैयार हैं. ईरान ने यहां तक कहा है कि वह अपने सबसे ज्यादा शुद्ध यूरेनियम को कम करने (Dilute) पर भी विचार कर सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह यूरेनियम को साफ करने (Enrichment) का काम पूरी तरह बंद नहीं करेगा. अमेरिका को डर है कि ईरान इस रास्ते से परमाणु हथियार बना सकता है, जबकि ईरान हमेशा से इससे इनकार करता रहा है.
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