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ईरान और अमेरिका के बीच लंबे वक्त से तनाव जारी है. इस बीच, ईरान ने यूरोपीय संघ की नेवी और एयरफोर्स को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के के विदेश मंत्रालय ने यूरोपियन संघ के सदस्य देशों की नेवी और एयरफोर्स को आतंकी संगठन घोषित किया है. खुद ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है.
इस वजह से ईरान ने किया फैसला
शनिवार को ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया था, जिसमें मंत्रालय ने कहा कि ये फैसला 2019 में आईआरजीसी को अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन घोषित करने के खिलाफ किया गया है. मंत्रालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद सात के तहत ऐसा किया गया है. बता दें, उस वक्त ईरान ने अमेरिका के इस फैसले की निंदा की थी और इसे अनुचित और अवैध करार दिया था.
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ईयू सदस्य देशों की सभी नौसेना और वायु सेना को इस कानून के दायरे में लाया गया है. पारस्परिकता के सिद्धांत को मानते हुए उन्हें आतंकी संगठन घोषित किया जा रहा है. ईरानी संविधान के अनुच्छेद सात के अनुसार, जो भी देश या कोई समूह अमेरिका के फैसले का समर्थन या उसे फॉलो करता है, उसके खिलाफ पारस्परिक कदम उठाया जाएगा.
ऐसे में सवाल आता है कि अगर अमेरिका ने आईआरजीसी को 2019 में आतंकी संगठन करार दिया था तो ईरान ने अब क्यों फैसला किया. तो बता दें, 19 फरवरी 2026 को ईयू काउंसिल ने आईआरजीसी को आतंकी सूची में शामिल करने का फैसला किया है, जिस वजह से ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है.
जानें ईयू का क्या मानना है
ईरान सरकार अपने इस फैसले को देश की संप्रभुता और सशस्त्र बलों की रक्षा के रूप में पेश कर रही है. वहीं, यूरोपीय पक्ष का कहना है कि ये फैसला आईआरजीसी की गतिविधियों पर लगाम लगाने और आईआरजीसी की ताकत कम करने के लिए किया गया है.
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