भारत अब पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान की खरीद पर दे रहा जोर, Sukhoi57 बना पहली पसंद

सुखोई-57 का प्रस्ताव देने के बाद रूस की ओर से एक टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की नासिक इकाई में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया.

सुखोई-57 का प्रस्ताव देने के बाद रूस की ओर से एक टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की नासिक इकाई में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया.

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Madhurendra Kumar
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सुखोई-57

भारत अब पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान की खरीद को लेकर कदम बढ़ा रहा है. इसको औपचारिक रूप देने की तैयारी में है. रिपोर्ट के अनुसार, रूस का #Sukhoi57 फिलहाल पहली पसंद के तौर पर सामने आया है. यह कदम भारत के अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के तैयार होने तक एक अस्थायी व्यवस्था माना जा रहा है. इसकी टाइमलाइन करीब 10 वर्ष बताई जा रही है.

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सुखोई-57 का प्रस्ताव देने के बाद रूसियों की ओर से एक टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की नासिक इकाई में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया. वर्ष 2007 में, भारत ने एचएएल के सहयोग से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संयुक्त विकास को लेकर रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. बताया जा रहा है कि दोनों देशों ने शुरुआत में परियोजना के लिए 6 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई थी. 

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

चीन पहले से अपने पांचवीं पीढ़ी के J-20 और J-35 जेट्स को ऑपरेशनल कर चुका है. रिपोर्ट में सामने आया है कि बीजिंग ने पाकिस्तान को भी ऐसे विमानों की पेशकश की है. पिछले वर्ष भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद घोषित “रियायतों” में शामिल था. क्षेत्रीय सामरिक संतुलन और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के तहत भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के जेट की तत्काल आवश्यकता बताई जा रही है.

क्या है 5जी विमान?

पांचवीं पीढ़ी (5जी) के विमान को क्षमता के अनुसार परिभाषित किया जाता है. यह पायलट को दुश्मन पर निर्णय लेने में श्रेष्ठता को बनाए रखने की इजाजत देता है. ऑनबोर्ड सेंसर और स्टील्थ तकनीक की वजह से दुश्मन के रडार के लिए पांचवीं पीढ़ी के विमान को ट्रैक करना आसान नहीं है. ये लाखों सॉफ्टवेयर कोड की ओर से संचालित होता है. 

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