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pm modi and china Photograph: (social media)
जब से अमेरिका ने भारत के साथ दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ थोपा है. तब से वैश्विक समीकरण में बदलाव देखा जा रहा है. पीएम मोदी जापान के दो दिवसीय दौरे पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यानी 29 अगस्त को भारत और चीन की साझेदारी को अहमियत दी. उन्होंने कहा कि भारत और चीन को मिलकर काम करना वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए काफी अहम है. उन्होंने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ने को तैयार है.
जापान की यात्रा के दौरान 'द योमिउरी शिंबुन' को दिए एक साक्षात्कार में पीएम ने कहा कि दो पड़ोसी और विश्व के दो सबसे बड़े देश होने के नाते भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित ओर मैत्रीपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा.
चीन के साथ बातचीत की दी जानकारी
चीन के साथ संबंधों में सुधार पर पूछे एक सवाल पर पीएम मोदी ने कहा,'राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर वे यहां से तियानजिन जाएंगे. यहां मैं शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. बीते साल कजान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी बैठक के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है.'
उन्होंने कहा कि दो पड़ोसी और विश्व के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिरता है. पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव है. उन्होंने कहा कि यह एक बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के लिए काफी अहम होगा.
रणनीतिक संवाद को बढ़ाने के लिए तैयार भारत: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, 'विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, भारत और चीन जैसे दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मिलकर काम करने की आवश्यकता है. वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाई जा सके.' उन्होंने कहा कि भारत आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने को लेकर रणनीतिक संवाद को बढ़ाने के लिए तैयार है.
जापान सरकार की 'निर्बाध और खुले हिंद-प्रशांत' की अवधारणा पर पीएम मोदी ने कहा कि इस रिश्ते में भारत और जापान की सोच में गहरा तालमेल रहा है. इसे भारत की ‘विजन महासागर’ और हिंद प्रशांत महासागरों की पहल को लेकर देखा जा सकता है.