इस बार जलाया नहीं, जहर पिलाकर की गई बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या, नहीं रुक रही है हिंदुओं पर हिंसा

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. सुनामगंज में जॉय महापात्रो की हत्या, नहर में कूदकर जान गंवाने वाले मिथुन सरकार और दीपु चंद्र दास की लिंचिंग ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है.

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. सुनामगंज में जॉय महापात्रो की हत्या, नहर में कूदकर जान गंवाने वाले मिथुन सरकार और दीपु चंद्र दास की लिंचिंग ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है.

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Ravi Prashant
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हिंदु युवक की हत्या Photograph: (X)

बांग्लादेश के सुनामगंज जिले में हिंदू समुदाय के एक युवक जॉय महापात्रो की हत्या का मामला सामने आया है. परिवार के अनुसार, गुरुवार को एक स्थानीय व्यक्ति ने जॉय के साथ मारपीट की और उसे जहर पिला दिया. गंभीर हालत में उन्हें Sylhet MAG Osmani Medical College Hospital के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

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नहर में कूदकर जान गंवाने वाला मिथुन सरकार

यह घटना उस मामले के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जिसमें 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई थी. मिथुन, सुनामगंज के पास भंडारपुर गांव का रहने वाला था. चोरी के संदेह में भीड़ द्वारा पीछा किए जाने पर वह जान बचाने के लिए एक नहर में कूद गया. बाद में पुलिस ने मंगलवार दोपहर को उसका शव बरामद किया. स्थानीय लोगों के अनुसार, भीड़ के डर से भागते समय उसे बाहर निकलने का मौका नहीं मिला.

चुनाव से पहले बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा

मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में हो रही व्यापक विफलता की ओर इशारा करती हैं. देश में 2024 के जन आंदोलन के बाद Sheikh Hasina सरकार के पतन के बाद पहली बार संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है.

दीपु चंद्र दास लिंचिंग केस में गिरफ्तारी

इसी बीच, बांग्लादेश पुलिस ने हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की लिंचिंग के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान यासीन अराफात के रूप में हुई है, जो एक पूर्व शिक्षक बताया जा रहा है. 27 वर्षीय दीपु, मयमनसिंह जिले में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था. उस पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था.

पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन ने पहले दीपु से इस्तीफा दिलवाया और फिर उसे उग्र भीड़ के हवाले कर दिया गया. भीड़ ने उसकी बेरहमी से पिटाई की, शव को पेड़ से लटकाया और आग के हवाले कर दिया. जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री के कुछ सहकर्मियों ने भी हमले में हिस्सा लिया था.

सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल

इन लगातार हो रही घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाओं के दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा.

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