क्या अमेरिका ने कर दी ईरान पर हमले की तैयारी? ये एक्शन कर रहे इशारा

अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर तीखा तनाव देखने को मिल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 'बोर्ड ऑफ पीस' नामक अंतरराष्ट्रीय मंच के गठन के महज एक दिन बाद ही हालात पलटते नजर आए.

अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर तीखा तनाव देखने को मिल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 'बोर्ड ऑफ पीस' नामक अंतरराष्ट्रीय मंच के गठन के महज एक दिन बाद ही हालात पलटते नजर आए.

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Dheeraj Sharma
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America may attack Iran soon

अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर तीखा तनाव देखने को मिल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 'बोर्ड ऑफ पीस' नामक अंतरराष्ट्रीय मंच के गठन के महज एक दिन बाद ही हालात पलटते नजर आए. शांति और स्थिरता की बात करने वाले अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे पश्चिम एशिया में अनिश्चितता और बढ़ गई है. ट्रंप ने कुछ ऐसे एक्शन लिए हैं जो इशारा कर रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान पर हमले की तैयारी कर ली है. या यूं कहें कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है. 

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1. खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जल्द ही अरब सागर या फारस की खाड़ी में तैनात हो सकता है. इस बेड़े में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और एक परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन शामिल है. खास बात यह है कि यह स्ट्राइक ग्रुप पहले दक्षिण चीन सागर में तैनात था, लेकिन ट्रंप के निर्देश के बाद इसे पश्चिम एशिया की ओर मोड़ दिया गया.

2. F-15E फाइटर जेट और मिसाइल सिस्टम सक्रिय

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट की तैनाती भी कर दी है. ये वही जेट हैं, जिन्हें अप्रैल 2024 में ईरान से जुड़े ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद इजरायल की सुरक्षा के लिए भेजा गया था. इसके अलावा KC-135 एयर रिफ्यूलिंग टैंकर भी क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे अमेरिकी लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक बिना रुके ऑपरेशन कर सकें.

3. एंटी-मिसाइल सुरक्षा और सहयोगी देशों की तैयारी

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने THAAD और पैट्रियट जैसी उन्नत एंटी-मिसाइल प्रणालियां भी सक्रिय कर दी हैं. इजरायल और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है. यह सैन्य तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.

ईरान के अंदर हालात और अमेरिकी आरोप

अमेरिका का दावा है कि ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त और हिंसक कार्रवाई की है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी सरकारी आंकड़ों में हजारों मौतों की बात कही जा रही है, जबकि मानवाधिकार संगठनों का दावा इससे कहीं ज्यादा हताहतों का है. ट्रंप कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अगर हिंसा नहीं रुकी तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है.

परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा सवाल

तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है. जून 2025 में हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के करीब 400 किलो समृद्ध यूरेनियम का ठिकाना अब तक स्पष्ट नहीं है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मात्रा कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त हो सकती है, जिससे वैश्विक चिंता और बढ़ गई है.

ईरान की चेतावनी और जवाबी तेवर

ईरान ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा. राष्ट्रपति मसूद पेकेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं. ईरान की रणनीतिक ताकत उसका भू-आर्थिक प्रभाव भी है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति करता है.

इजरायल की संभावित भूमिका

अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव होता है, तो इजरायल भी इसमें शामिल हो सकता है. इजरायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली किसी भी जवाबी हमले को सीमित करने में अहम मानी जाती है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिन तय करेंगे कि यह तनाव बातचीत की मेज तक पहुंचेगा या संघर्ष के नए दौर की शुरुआत करेगा.

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