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India-EU Partnership: विश्व में तेजी से हालात बदल रहे हैं. अमेरिका के हालिया कदमों से यूरोपीय देशों का अमेरिका पर भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है. ऐसे में अब नए नेतृत्व की तलाश तेज हो चुकी है. इसमें भारत का नाम सबसे आगे है. पीएम मोदी को लेकर संघ ज्यादा भरोसा जता रहा है. यह संकेत खुद यूरोपीय संघ के नेता दे रहे हैं. यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत के साथ मिलकर एक शक्तिशाली एजेंडे पर काम करने का ऐलान करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है.
भारत के साथ यूरोपीय संघ करेगा रणनीतिक साझेदारी
यूरोपीय संघ ने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने को लेकर बड़ी रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी का ऐलान किया. ईयू की इस पहल से अमेरिका और चीन को बड़ा झटका लगा है. EU की विदेश नीति प्रमुख और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में ऐलान किया कि दोनों पक्षों ने नई सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (Security and Defence Partnership) पर हस्ताक्षर को लेकर सहमति जताई है. इनमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई के साथ साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देना है. इससे यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग में नए अध्याय की शुरूआत होगी.
नई दिल्ली में भारत-ईयू के बीच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर संभव
कलास के अनुसार, यूरोप भारत के साथ एक शक्तिशाली नया एजेंडा लागू करने को तैयार है.उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में खुले समुद्री मार्गों की रक्षा, समुद्री जागरूकता को मजबूत करने पर अधिक जोर दिया.अगले हफ्ते नई दिल्ली में 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन यह साझेदारी सामने आएगी. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत के गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर मुख्य अतिथि होने वाले हैं.
कलास ने कहा-यूरोप के लिए भारत सबसे महत्वपूर्ण
कलास का कहना है कि यूरोप के लिए भारत सबसे अहम है. उन्होंने कहा कि यूरोप के आर्थिक लचीलापन के लिए भारत "अनिवार्य" है. दोनों प्रमुख लोकतंत्रों को वैश्विक अस्थिरता के दौर में ज्यादा महत्वाकांक्षी साझेदार बनाना जरूरी है. इस समझौते से सूचना सुरक्षा समझौते पर चर्चा शुरू होगी. इस तरह से गोपनीय जानकारी को साझा करने में आसानी होगी. इस शिखर सम्मेलन में 2030 तक के कई रणनीतिक एजेंडे को सामने रखा जाएगा.
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