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Greenland Row (NN)
Greenland Row: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी है, जो लंबे वक्त से विवाद का विषय बन गई है. अमेरिका की धमकी की वजह से कई नाटो देशों ने ऑपरेशन आर्कटिक एंडयोरेंस नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया. इसके लिए कई यूरोपीय देशों ने अपने सैनिकों को ग्रीनलैंड में भेजा है.
ग्रीनलैंड भेजे जा रहे हैं इतने सैनिक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस ने 15 सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजा है. जर्मनी ने 13 सैनिकों की एक टीम को फ्रांस भेजा है. नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड ने दो-दो सैनिकों को तैनात किया है. ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड एक सैन्य अधिकारी भेजा है. स्वीडन ने भी सैनिकों को भेजने की पुष्टि की है. हालांकि, उसकी संख्या का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं हो पाया है. डेनमार्क के अलावा, यूरोपीय देशों के करीब 35 से 40 सैन्यकर्मी भी पहुंचे हैं.
ग्रीनलैंड को हर तरफ से मजबूत किया जाएगा
डेनमार्क ने पहले से ही ग्रीनलैंड में करीब 200 सैनिक तैनात किए हुए है. इसके अलावा, 14 सदस्यीय सीरियस डॉग स्लाेज पेट्रोल भी वहां मौजूद है. ये वहीं डॉग्स हैं, जो आर्कटिक इलाकों में गश्त करते हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मजबूत किया जाएगा. ये संख्या छोटी है लेकिन राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि नाटो एकजुट है.
पोलैंड और इटली ने मिशन से बनाई दूरी
नाटो के कुछ बड़े सैन्य ताकत वाले देशों ने इस मिशन से दूरी बना ली है. पोलैंड, इटली और तुर्किए ने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने से मना कर दिया है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साफ कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड में सैनिक नहीं भेजेगा. दरअसल, पोलैंड को रूस की चिंता है, जिस वजह से वह अपने सैनिकों को रूसी बॉर्डर पर ही तैनात रखना चाहता है. वहीं, इटली के रक्षामंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने पूरे ऑपरेशन को मजाक जैसा कहा है.
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