ईरान पर EU का बड़ा एक्शन, 15 अधिकारी और 6 संगठनों को किया बैन

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल ईरान पर ईयू ने कड़ एक्शन लिया है. ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव और तेज हो गया है.

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल ईरान पर ईयू ने कड़ एक्शन लिया है. ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव और तेज हो गया है.

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Dheeraj Sharma
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EU Actinon against IRan

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल ईरान पर ईयू ने कड़ एक्शन लिया है. ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव और तेज हो गया है. यूरोपीय संघ (EU) ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ईरान के 15 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. यही नहीं इन अधिकारियों में अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के शीर्ष कमांडर और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े कई वरिष्ठ अफसर शामिल हैं.  इसके साथ ही छह ईरानी संगठनों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है.

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क्यों लगाए गए नए प्रतिबंध?

यूरोपीय संघ का कहना है कि ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया. पश्चिमी देशों के आकलन के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई में अब तक 6,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ईयू का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए योजनाबद्ध और संगठित तरीके से हिंसा का सहारा लिया, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.

रिवोल्यूशनरी गार्ड पर बढ़ता दबाव

ईयू की ओर से ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित करने की दिशा में उठाया गया कदम इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बनाता है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईरान पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों की सूची और लंबी हो सकती है. इससे इस्लामिक गणराज्य पर आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य दबाव और बढ़ेगा.

रूस की चेतावनी: बातचीत अभी संभव

इस बीच रूस ने हालात को लेकर संयम बरतने की अपील की है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की जाती है तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था अस्थिर हो सकती है. रूस का मानना है कि बल प्रयोग की बजाय कूटनीतिक बातचीत ही इस संकट का समाधान निकाल सकती है.

क्या अमेरिका जंग की तैयारी में है?

यूरोपीय संघ का यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लगातार कड़ी चेतावनियां दे रहे हैं. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने विमानवाहक पोतों का एक समूह तैनात किया है, जिसे ईरान पर बढ़ते दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. पश्चिमी देशों का कहना है कि यह तैनाती केवल सुरक्षा और deterrence के लिए है, लेकिन ईरान इसे सीधे तौर पर सैन्य धमकी मान रहा है.

मध्य पूर्व में बढ़ती बेचैनी

विश्लेषकों के मुताबिक, ईयू के नए प्रतिबंध, अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और रूस की चेतावनी तीनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि मध्य पूर्व एक बार फिर नाजुक मोड़ पर खड़ा है. अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो यह संकट क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर सकता है. ऐसे में आने वाले हफ्ते ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.

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