विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 56वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में उस वक्त कूटनीतिक हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. ट्रंप ने मंच से ही कनाडा को अमेरिका के प्रति 'अधिक कृतज्ञ' यानी और आभारी होने की नसीहत दे डाली. ट्रंप ने कहा कि कनाडा को अमेरिका से कई 'मुफ्त सुविधाएं' मिलती हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां की राजनीतिक नेतृत्व में आभार की कमी दिखती है.
ट्रंप का सख्त संदेश
दावोस में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका की रणनीतिक और सुरक्षा मदद पर काफी हद तक निर्भर है. उन्होंने यहां तक कहा कि 'कनाडा का अस्तित्व ही अमेरिका की वजह से है.' ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उनकी प्रस्तावित 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम से न सिर्फ अमेरिका, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. ट्रंप की यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित थी, जिनकी भाषा और रुख से ट्रंप असहमत नजर आए.
कार्नी का अप्रत्यक्ष पलटवार
दरअसल, ट्रंप की नाराजगी की जड़ कनाडा के प्रधानमंत्री का वही भाषण था, जिसमें उन्होंने वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई थी. WEF में अपने संबोधन के दौरान मार्क कार्नी ने कहा कि दुनिया अब 'नियम-आधारित व्यवस्था' से हटकर 'महान शक्ति प्रतिद्वंद्विता' के दौर में प्रवेश कर चुकी है. उन्होंने व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखलाओं को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई, जिसे अमेरिका की टैरिफ नीति और ग्रीनलैंड से जुड़े संकेतों से जोड़ा जा रहा है.
वैश्विक व्यवस्था पर कार्नी की चेतावनी
कार्नी ने कहा कि दुनिया किसी सामान्य बदलाव से नहीं, बल्कि एक गहरी 'दरार' से गुजर रही है. उनके मुताबिक, आज की वैश्विक व्यवस्था में शक्तिशाली देश मनमाने फैसले ले रहे हैं, जबकि कमजोर देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. उन्होंने माना कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कभी भी पूरी तरह आदर्श नहीं रही, लेकिन अब हालात और ज्यादा कठोर हो गए हैं. कार्नी ने संप्रभुता, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय अखंडता जैसे मूल्यों के साथ नए सिरे से बहुपक्षीय सहयोग की वकालत की.
अमेरिका पर परोक्ष निशाना
कनाडाई प्रधानमंत्री के बयान को अमेरिका की टैरिफ नीति और हालिया भू-राजनीतिक रुख पर एक अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है. कार्नी ने यह भी कहा कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश अक्सर सुविधा के अनुसार नियमों को तोड़ते या नजरअंदाज करते रहे हैं. यही बयान ट्रंप को चुभ गया और उन्होंने खुले मंच से कड़ा जवाब दिया.
रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
डब्ल्यूईएफ में हुआ यह टकराव अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है. जहां ट्रंप 'कृतज्ञता' और सुरक्षा सहयोग पर जोर दे रहे हैं, वहीं कार्नी वैश्विक व्यवस्था में संतुलन और नियमों की बात कर रहे हैं. आने वाले समय में यह मतभेद उत्तर अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई बहस को जन्म दे सकता है.
यह भी पढ़ें - फ्रांस और कनाडा ने बड़ी ताकतों के खतरे का मुकाबला करने के लिए एकजुटता की अपील की
US की वजह से जिंदा है कनाडा, WEF टिप्पणी पर ट्रंप बोले- कार्नी को और ज्यादा आभारी होना चाहिए
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 56वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में उस वक्त कूटनीतिक हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी.
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 56वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में उस वक्त कूटनीतिक हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी.
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 56वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में उस वक्त कूटनीतिक हलचल तेज हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी. ट्रंप ने मंच से ही कनाडा को अमेरिका के प्रति 'अधिक कृतज्ञ' यानी और आभारी होने की नसीहत दे डाली. ट्रंप ने कहा कि कनाडा को अमेरिका से कई 'मुफ्त सुविधाएं' मिलती हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां की राजनीतिक नेतृत्व में आभार की कमी दिखती है.
ट्रंप का सख्त संदेश
दावोस में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि कनाडा अमेरिका की रणनीतिक और सुरक्षा मदद पर काफी हद तक निर्भर है. उन्होंने यहां तक कहा कि 'कनाडा का अस्तित्व ही अमेरिका की वजह से है.' ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उनकी प्रस्तावित 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम से न सिर्फ अमेरिका, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. ट्रंप की यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित थी, जिनकी भाषा और रुख से ट्रंप असहमत नजर आए.
कार्नी का अप्रत्यक्ष पलटवार
दरअसल, ट्रंप की नाराजगी की जड़ कनाडा के प्रधानमंत्री का वही भाषण था, जिसमें उन्होंने वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई थी. WEF में अपने संबोधन के दौरान मार्क कार्नी ने कहा कि दुनिया अब 'नियम-आधारित व्यवस्था' से हटकर 'महान शक्ति प्रतिद्वंद्विता' के दौर में प्रवेश कर चुकी है. उन्होंने व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखलाओं को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई, जिसे अमेरिका की टैरिफ नीति और ग्रीनलैंड से जुड़े संकेतों से जोड़ा जा रहा है.
वैश्विक व्यवस्था पर कार्नी की चेतावनी
कार्नी ने कहा कि दुनिया किसी सामान्य बदलाव से नहीं, बल्कि एक गहरी 'दरार' से गुजर रही है. उनके मुताबिक, आज की वैश्विक व्यवस्था में शक्तिशाली देश मनमाने फैसले ले रहे हैं, जबकि कमजोर देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. उन्होंने माना कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कभी भी पूरी तरह आदर्श नहीं रही, लेकिन अब हालात और ज्यादा कठोर हो गए हैं. कार्नी ने संप्रभुता, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय अखंडता जैसे मूल्यों के साथ नए सिरे से बहुपक्षीय सहयोग की वकालत की.
अमेरिका पर परोक्ष निशाना
कनाडाई प्रधानमंत्री के बयान को अमेरिका की टैरिफ नीति और हालिया भू-राजनीतिक रुख पर एक अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है. कार्नी ने यह भी कहा कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश अक्सर सुविधा के अनुसार नियमों को तोड़ते या नजरअंदाज करते रहे हैं. यही बयान ट्रंप को चुभ गया और उन्होंने खुले मंच से कड़ा जवाब दिया.
रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
डब्ल्यूईएफ में हुआ यह टकराव अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है. जहां ट्रंप 'कृतज्ञता' और सुरक्षा सहयोग पर जोर दे रहे हैं, वहीं कार्नी वैश्विक व्यवस्था में संतुलन और नियमों की बात कर रहे हैं. आने वाले समय में यह मतभेद उत्तर अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई बहस को जन्म दे सकता है.
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