ईरान पर हमले को लेकर ब्रिटेन ने सहयोग से किया इनकार, अमेरिका को RAF एयरबेस नहीं देने का लिया फैसला

अमेरिका और ईरान बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंचा. इसके कारण मिडिल ईस्ट में महायुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के अनुरोध को ठुकरा दिया है. उसने इस भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.

अमेरिका और ईरान बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंचा. इसके कारण मिडिल ईस्ट में महायुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के अनुरोध को ठुकरा दिया है. उसने इस भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.

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Mohit Saxena
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ब्रिटेन के पीएम कीएर स्टार्मर ने ईरान पर संभावित हमलों को लेकर ब्रिटिश वायु सेना (RAF) के ठिकानों का उपयोग करने के अमेरिकी अनुरोध को ठुकरा दिया है. इस निर्णय के बाद ब्रिटेन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के आसार हैं. इसका सीधार असर चागोस द्वीप समूह के भविष्य पर पड़ सकता है. दरअसल, अमेरिका और ईरान बीच सैन्य तनाव बढ़ता जा रहा है. इसके कारण मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के हालात बन चुके हैं. 

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हमले के लिए अनुमति देना जरूरी है

इस बीच ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के अनुरोध को यह कहते हुए इनकार किया कि इस तरह के हमले में भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन ने विशेष रूप से ग्लॉस्टरशायर के पास स्थित रॉयल एयर फोर्स बेस फैयरफोर्ड और हिन्द महासागर में स्थित डियेगो गार्सिया को उपयोग करने की इजाजत नहीं दी है. ये सैन्य ठिकाने संयुक्त रूप  से ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से उपयोग किए जाते रहे हैं, लेकिन किसी भी हमले के लिए अनुमति देना जरूरी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा रुख 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सरकार के इस रुख पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि अमेरिका  को डियेगो गार्सिया तथा फैयरफोर्ड जैसे ठिकानों की जरूरत है. इस तरह से ईरान से संभावित सुरक्षा खतरों का  सामना किया जा सकेगा. उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री की योजना पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह गलत फैसला हो सकता है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका को इन ठिकानों तक पहुंच की जरूरत पड़ सकती है.

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