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बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आया है. ढाका की एक विशेष अदालत ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सरकारी आवास परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं के दो अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला सोमवार को सुनाया गया, जिसने देश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है.
सरकारी पद के दुरुपयोग का आरोप
अदालत के अनुसार, 79 वर्षीय शेख हसीना ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए राजधानी ढाका के पुरबाचोल स्थित राजुक न्यू टाउन परियोजना में अपने परिजनों को आवासीय भूखंड आवंटित करवाए. इनमें उनकी भतीजी और ब्रिटेन की लेबर पार्टी की सांसद एवं पूर्व मंत्री ट्यूलिप सिद्दीक का नाम भी शामिल है. अदालत ने इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना.
अनुपस्थिति में सुनाया गया फैसला
विशेष न्यायाधीश रोबी-उल आलम ने यह फैसला शेख हसीना और अन्य आरोपियों की अनुपस्थिति में सुनाया. अदालत ने कहा कि आरोपियों के देश से बाहर होने के आधार पर मुकदमे को नहीं रोका जा सकता. यही कारण है कि बिना उनकी मौजूदगी के सुनवाई पूरी कर सजा सुनाई गई.
परिवार के सदस्यों को भी जेल
इस मामले में शेख हसीना के परिवार के अन्य सदस्यों को भी दोषी ठहराया गया. ट्यूलिप सिद्दीक की बहन आजमान सिद्दीक और भाई रदवान मुजीब सिद्दीक बॉबी को सात साल के कठोर कारावास की सजा दी गई. इसके अलावा, मामले के अन्य आरोपियों को पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है.
राजुक के अधिकारी भी दोषी
कुल 16 आरोपियों में से केवल एक आरोपी, राजुक के वरिष्ठ अधिकारी खुर्शीद आलम, अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए. उनके अलावा आवास मंत्रालय के पूर्व कनिष्ठ मंत्री, पूर्व सचिव, राजुक के पूर्व अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों को भी दोषी पाया गया.
अवामी लीग ने फैसले को बताया साजिश
इस फैसले पर शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इन सजाओं को पहले से तय और अंतरिम सरकार द्वारा रचे गए 'झूठे मुकदमे' करार दिया. पार्टी का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं.
ट्यूलिप सिद्दीक का पलटवार
ब्रिटेन की सांसद ट्यूलिप सिद्दीक ने भी इस पूरे मामले को 'हास्यास्पद' बताया. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोई आधिकारिक समन या आरोपपत्र तक नहीं भेजा गया और पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण रही.
राजनीतिक उथल-पुथल
बता दें कि 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. इसके बाद अंतरिम सरकार ने उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज किए. इससे पहले भी एक अदालत उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में मौत की सजा सुना चुकी है.
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