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Tarique Rahman: (X@trahmanbnp)
Bangladesh Elections: बांग्लादेश में तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. 13 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव हुए थे, जिसमें बीएनपी के टिकट पर उतरे दो हिंदुओं ने भी जीत हासिल की है. गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका-3 सीट से जीते हैं तो वहीं निताई राय चौधरी ने वेस्ट मागुरा सीट से जीत हासिल की है. इस बीच लोगों के मन में एक सवाल है कि क्या कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. आइये जानते हैं इस बारे में…
बांग्लादेश के संविधान के अनुसार कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. बांग्लादेशी संविधान में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी खास धर्म से होने के बारे में नहीं लिखा है. बांग्लादेश में अगर एक व्यक्ति कुछ शर्तों को पूरा कर लेता है तो वह देश का प्रधानमंत्री बन सकता है.
इन शर्तों को पूरा करना जरूरी
बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले जातीय संसद का सदस्य होना पड़ेगा. बांग्लादेश की नेशनल पार्लियामेंट को जातीय संसद कहा जाता है. पार्लियामेंट का सदस्य हुए बिना प्रधानमंत्री नहीं बना जा सकता है. व्यक्ति बांग्लादेश का ही नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. ये बुनियादी और संवैधानिक जरूरते हैं, जो हर एक उम्मीदवार पर लागू होती है. इन शर्तों का किसी धर्म और जाति से लेना-देना नहीं है.
संसद में बहुमत होना जरूरी
संसद के अधिकांश सदस्यों का विश्वास प्रधानमंत्री को हासिल होना चाहिए. बांग्लादेश में संसद में बहुमत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है. संविधान में ऐसा कोई भी क्लॉज नहीं है, जिसमें कहा गया हो कि सिर्फ मुस्लिम ही देश का नेतृत्व कर सकता है.
अब जानें बांग्लादेशी संविधान के बारे में
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी संविधान के आर्टिकल 41 में हर नागरिक को अपने धर्म को आजादी से मानने और फैलाने का अधिकार है. आर्टिकल 28 धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव पर रोकता है. आर्टिकल 19 सभी नागरिकों को बराबरी के मौके देने की बात करता है.
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