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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम का श्रेय खुद को दिया है. वॉशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनकी मध्यस्थता और टैरिफ की चेतावनी के कारण दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ. हालांकि, भारत पहले भी ऐसे दावों को खारिज करता रहा है और इस बार भी आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं है. लेकिन इन सबके बीच जो चर्चा का विषय बना वो था ट्रंप का पाकिस्तानी पीएम के प्रति रवैया. उन्होंने भरी सभा में शहबाज शरीफ की बेइज्जती कर डाली, खास बात यह है कि इस दौरान उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में कसीदे भी पढ़े. इसकी वीडियो भी सामने आया है.
ऐसे हुई शहबाज शरीफ की बेइज्जती
बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल थे. ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का जिक्र करते हुए उनका धन्यवाद किया. संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा, ' मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है. वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे होंगे.' इसके तुरंत बाद उन्होंने शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा फिर मंच से ही बोले- भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया. मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं.'
Trump to Pak PM- Stand up
— Frontalforce 🇮🇳 (@FrontalForce) February 20, 2026
Shahbaz Sharif immediately stands up 🤣🤣pic.twitter.com/YwMljX6gsF
ट्रंप ने एक ही मंच से जहां शहबाज शरीफ को सबके सामने खड़ा होने के लिए कह दिया वहीं उसी वक्त पीएम मोदी की तारीफ कर उन्हें खुद का महान दोस्त भी बताया.
पाकिस्तान का रुख
शहबाज शरीफ ने बैठक में ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि उस समय हालात बेहद संवेदनशील थे. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य तनाव तेजी से बढ़ रहा था और क्षेत्रीय शांति के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी था. शरीफ ने माना कि अमेरिकी पहल ने स्थिति को और बिगड़ने से रोका.
भारत का स्पष्ट इनकार
भारत ने पहले भी साफ किया है कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से संघर्षविराम नहीं हुआ. नई दिल्ली का कहना है कि मई में हुए सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के जरिए सहमति बनी थी. भारत का स्थायी रुख रहा है कि पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दे द्विपक्षीय ढांचे में ही सुलझाए जाएंगे.
कूटनीतिक संदेश या घरेलू राजनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेतृत्व की छवि को मजबूत करने की कोशिश भी हो सकता है. वहीं, पाकिस्तान के लिए यह अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करने का अवसर है. दूसरी ओर, भारत अपने पारंपरिक रुख ‘कोई तीसरी मध्यस्थता नहीं’पर कायम दिखाई देता है.
साफ है कि एक ही घटना को लेकर तीन अलग-अलग राजनीतिक संदेश सामने आ रहे हैं. जहां ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं, वहीं भारत इसे द्विपक्षीय सैन्य संवाद का परिणाम मानता है. दक्षिण एशिया की राजनीति में यह बयानबाजी आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है.
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