जहर से गई थी रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की जान, यूरोपीय देशों ने किया बड़ी साजिश का दावा

Alexei Navalny Death: पांच यूरोपीय देशों ने दावा किया है कि रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की मौत घातक जहर से हुई थी और इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है.

Alexei Navalny Death: पांच यूरोपीय देशों ने दावा किया है कि रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की मौत घातक जहर से हुई थी और इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है.

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Yashodhan Sharma
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रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की मौत को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड समेत पांच यूरोपीय देशों ने दावा किया है कि नवेलनी की मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उन्हें एक घातक जहर देकर निशाना बनाया गया था. इन देशों ने इस घटना के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है.

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दक्षिण अमेरिकी मेंढकों का था जहर 

शनिवार को जारी संयुक्त बयान में इन देशों के विदेश मंत्रालयों ने कहा कि नवेलनी के सैंपलों की जांच के बाद “एपिबैटिडीन” नामक खतरनाक जहर की पुष्टि हुई है. यह जहर दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जहरीले मेंढकों, जिन्हें पॉयजन डार्ट फ्रॉग कहा जाता है, में पाया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह विष बेहद घातक होता है और कम मात्रा में भी जानलेवा साबित हो सकता है.

रूसी राज्य की अहम भूमिका का आरोप

विदेश मंत्रालयों के संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह के जहर का इस्तेमाल करने के लिए जिन संसाधनों और क्षमता की जरूरत होती है, वह केवल किसी राज्य के पास ही हो सकती है. यूरोपीय देशों का आरोप है कि इस हमले के पीछे रूसी राज्य की भूमिका हो सकती है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है.

कौन हैं एलेक्सी नवेलनी

एलेक्सी नवेलनी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे मुखर आलोचकों में से एक माने जाते थे. वे लंबे समय से राजनीतिक दबाव और कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे. दो साल पहले हिरासत के दौरान उनकी मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही उनकी मौत को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

तनाव बढ़ने की आशंका 

इस ताजा दावे के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, रूस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह मामला एक बार फिर रूस में राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर वैश्विक बहस को तेज कर सकता है.

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