शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव पश्चिम दिशा के स्वामी माने जाते हैं

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सूरज पूरब दिशा की ओर से निकलते हैं. ऐसे में पूरब दिशा की ओर शनिदेव की पीठ पड़ती है

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इसलिए शनिदेव की पूजा सूर्योदय से पहले या फिर सूर्यास्त के बाद की जाती है

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सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करने से शनिदेव जल्द प्रसन्न होते हैं

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शनि और सूर्य की बात करें तो पिता-पुत्र का रिश्ता होने का बाद भी दोनों के बीच घोर शत्रुता है

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सुबह से लेकर शाम तक सूर्यदेव का ही प्रभाव होता है, इसलिए सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए.

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