1 नवंबर को करवा चौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि और शिव योग का संयोग बन रहा है.

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करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करके दीपक जलाएं.

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अपनी सास या पति के हाथों से सरगी लें और इसे सुर्योदय से पहले ग्रहण कर लें.

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'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये' बोलकर व्रत शुरु करे

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शाम के समय पुनः स्नान के बाद सुहागन स्त्री की तरह अच्छे से तैयार हों.

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करवा चौथ पूजने वाले स्थान पर गेहूं से फलक बनाएं और चावल पीस कर करवा की तस्वीर बनाएं.

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इसके बाद आठ पूरियों की अठवारी बनाकर उसके साथ हलवा या खीर बनाएं और पक्का भोजन तैयार करें.

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कुछ विवाहित महिलाएं थाली में मट्ठी, चावल और बादाम के साथ आटे का दीपक रखकर भी पूजा करती हैं

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अब मां गौरी को चौकी पर स्थापित करें और लाल रंग कि चुनरी ओढ़ा कर उन्हें शृंगार का सामान अर्पित करें.

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मां गौरी के सामने जल से भरा कलश रखें और साथ ही टोंटीदार करवा भी रखें जिससे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा

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इसके बाद विधि पूर्वक गणेश गौरी की विधिपूर्वक पूजा करें और करवा चौथ की कथा सुनें.

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कथा सुनने से पूर्व करवे पर रोली से एक सतिया बनाएं और करवे पर रोली से 13 बिंदिया लगाएं.

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कथा सुनते समय हाथ पर गेहूं या चावल के 13 दाने लेकर कथा सुनें.

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पूजा करने के बाद चंद्रमा निकलते ही छलनी से चंद्र दर्शन करें फिर उसी से पति को देखें.

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इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपने व्रत का पारण करें.

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