हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है

Photo Credit : Social Media

हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस साल जितिया व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा

Photo Credit : Social Media

व्रत करने वाली महिलाएं 6 अक्टूबर को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें

Photo Credit : Social Media

स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर व्रत-पूजा का संकल्प लें

Photo Credit : Social Media

चूंकि इस व्रत का पालन निर्जला रहकर करना होता है. ऐसे में इस पूरे दिन कुछ भी खाएं-पीएं नहीं

Photo Credit : Social Media

शाम को गाय के गोबर से पूजन स्थल को लीप दें

Photo Credit : Social Media

पूजा स्थल को गोबर से लीपने के बाद शुद्ध स्थान की मिट्टी से छोटा सा तालाब भी बना लें

Photo Credit : Social Media

इस तालाब के निकट एक पाकड़ यानी कि किसी भी पेड़ की डाल लाकर खड़ी कर दें

Photo Credit : Social Media

कुशा अर्थात घास से जीमूतवाहन का पुतला बनाएं उनकी पूजा करें, उन्हें धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला चढ़ाएं

Photo Credit : Social Media

इसके बाद मिट्टी या गाय के गोबर से चिल्होरिया यानी कि मादा चील और सियारिन की मूर्ति बनाएं

Photo Credit : Social Media

मूर्ती बनाने के बाद चिल्होरिया और सियारिन के माथे पर लाल सिंदूर लगाएं

Photo Credit : Social Media

अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए दिनभर उपवास कर बांस के पत्तों से पूजा करें

Photo Credit : Social Media

पूजा के बाद इस व्रत की कथा जरूर सुनें या पढ़ें

Photo Credit : Social Media

अगले दिन दान-पुण्य के बाद व्रत का पारण करें. तभी इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होगा

Photo Credit : Social Media