हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस साल जितिया व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा
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व्रत करने वाली महिलाएं 6 अक्टूबर को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें
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स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर व्रत-पूजा का संकल्प लें
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चूंकि इस व्रत का पालन निर्जला रहकर करना होता है. ऐसे में इस पूरे दिन कुछ भी खाएं-पीएं नहीं
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शाम को गाय के गोबर से पूजन स्थल को लीप दें
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पूजा स्थल को गोबर से लीपने के बाद शुद्ध स्थान की मिट्टी से छोटा सा तालाब भी बना लें
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इस तालाब के निकट एक पाकड़ यानी कि किसी भी पेड़ की डाल लाकर खड़ी कर दें
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कुशा अर्थात घास से जीमूतवाहन का पुतला बनाएं उनकी पूजा करें, उन्हें धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला चढ़ाएं
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इसके बाद मिट्टी या गाय के गोबर से चिल्होरिया यानी कि मादा चील और सियारिन की मूर्ति बनाएं
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मूर्ती बनाने के बाद चिल्होरिया और सियारिन के माथे पर लाल सिंदूर लगाएं
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अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए दिनभर उपवास कर बांस के पत्तों से पूजा करें
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पूजा के बाद इस व्रत की कथा जरूर सुनें या पढ़ें
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अगले दिन दान-पुण्य के बाद व्रत का पारण करें. तभी इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होगा
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