20 जून को रात 10:04 बजे यात्रा शुरू होगी और यात्रा का समापन 21 जून को शाम 07:09 बजे पर होगा

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उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की यात्रा हर साल धूमधाम से निकाली जाती है.

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हर साल इस भव्य रथयात्रा के लिए 3 रथ तैयार किए जाते हैं

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पहला बड़ा रथ भगवान जगन्नाथ का होता है और बाकि दो उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ होते हैं.

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अक्षय तृतीया के दिन से ही शुरू हो जाती है भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी

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नीम और हांसी के पेड़ों की लकड़ियों से बनाए जाते हैं रथ

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सोने की कुल्हाड़ी को पहले भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा से स्पर्श कराके होती है पेड़ों की कटायी

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जंगल में सोने की लकड़ी से जो पेड़ काटकर लाए जाते हैं उसी से बनाए जाते हैं रथ

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तीनों रथों के निर्माण में लिए लगभग 884 पेड़ों के 12-12 फीट के तने लगते हैं.

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भगवान जगन्नाथ के रथ कोनंदीघोष. भगवान बलभद्र के रथ को तालध्वज और देवी सुभद्रा के रथ को पद्म रथ कहते ह

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