चांदीपुरा वायरस पहली बार नागपुर के चांदीपुर में पाया गया था

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इस वजह से इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ गया

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चांदीपुरा वायरस मादा फ्लेबोटोमाइन मक्खी से फैलता है

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यह वायरस मच्छर और सैंड फ्लाई के काटने से भी होता है

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चांदीपुरा वायरस सबसे ज्यादा बच्चों को अपनी चपेट में लेता है

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जिसमें 9-14 साल के बच्चों को चांदीपुरा वायरस से सबसे ज्यादा खतरा रहता है

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इस वायरस का अभी तक कोई एंटीवायरल ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है

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मरीज के लक्षणों को देखकर ही इसका इलाज किया जाता है

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