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डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ Photograph: (X/@MDUmairKh)
पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ उस समय विवादों में घिर गए जब वह सियालकोट कैंटोनमेंट में पिज़्जा हट ब्रांडिंग वाले एक आउटलेट के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए. इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें ख्वाजा आसिफ को रिबन काटते, लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाते और तालियों के बीच उद्घाटन करते देखा गया.
उद्घाटन के तुरंत बाद यह मामला तब तूल पकड़ गया जब पिज़्जा हट पाकिस्तान ने सार्वजनिक बयान जारी कर इस आउटलेट को अनधिकृत और फर्जी बताया. कंपनी ने स्पष्ट किया कि सियालकोट कैंटोनमेंट में खुला यह ऑउटलेट Pizza Hut Pakistan या उसकी मूल कंपनी Yum! Brands से किसी भी प्रकार से जुड़ा नहीं है.
Pizza Hut Pakistan का स्पष्टीकरण
अपने बयान में कंपनी ने कहा कि पाकिस्तान में वर्तमान में केवल 16 अधिकृत Pizza Hut स्टोर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से 14 लाहौर और दो इस्लामाबाद में स्थित हैं. कंपनी के अनुसार सियालकोट का यह आउटलेट न तो अंतरराष्ट्रीय पिज़्जा हट रेसिपी का पालन करता है और न ही गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और संचालन मानकों का.
कंपनी ने यह भी बताया कि उसने अपने ट्रेडमार्क के दुरुपयोग को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है. बयान में ग्राहकों को भी सतर्क रहने की अपील की गई.
सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं रिएक्शन?
इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर ख्वाजा आसिफ को लेकर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया. कई उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि अगर आउटलेट असली भी होता, तब भी एक रक्षा मंत्री का किसी पिज्जा स्टोर के उद्घाटन में शामिल होना कितना उचित है.
एक यूजर ने लिखा कि यह समझ से परे है कि देश के रक्षा मंत्री ऐसे आयोजनों में समय क्यों बिता रहे हैं. वहीं एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए कहा कि खुफिया एजेंसियों को इस फर्जीवाड़े की जानकारी पहले से रही होगी लेकिन उन्होंने मंत्री को सूचित नहीं किया.
कुछ प्रतिक्रियाएं और भी तीखी रहीं. एक टिप्पणी में कहा गया कि पूरे देश की व्यवस्था ही अव्यवस्थित है और ऐसे में एक नकली Pizza Hut पर हैरानी जताना बेमानी है. इन प्रतिक्रियाओं ने इस मामले को केवल एक ब्रांड विवाद से आगे बढ़ाकर राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों से जोड़ दिया है.
क्या डिफेंस मिनिस्टरी से सामने आया बयान?
हालांकि ख्वाजा आसिफ या रक्षा मंत्रालय की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह घटना सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है. विपक्षी समर्थक इसे नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर सवाल के रूप में देख रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि मंत्री को आयोजकों द्वारा गुमराह किया गया होगा. फिलहाल मामला कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक बहस दोनों के केंद्र में बना हुआ है, और यह देखना अहम होगा कि संबंधित अधिकारी और सरकार इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाते हैं.
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