रेगिस्तानी लोमड़ी भूल जाइए, ये है माइनस डिग्री तापमान को मात देने वाली 'हिल फॉक्स'

जम्मू-कश्मीर के जोजिला दर्रा में हिमालयी रेड फॉक्स देखे जाने की दुर्लभ घटना सामने आई है. स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों द्वारा दर्ज इस दृश्य ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों की नाजुक लेकिन समृद्ध जैव विविधता और संरक्षण की जरूरत को रेखांकित किया है.

जम्मू-कश्मीर के जोजिला दर्रा में हिमालयी रेड फॉक्स देखे जाने की दुर्लभ घटना सामने आई है. स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों द्वारा दर्ज इस दृश्य ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों की नाजुक लेकिन समृद्ध जैव विविधता और संरक्षण की जरूरत को रेखांकित किया है.

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Ravi Prashant
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हिल रेड फॉक्स Photograph: (X/ani)

जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों वाले इलाके जोजिला दर्रा (Zojila Pass) में हाल ही में एक बहुत ही दुर्लभ नजारा देखने को मिला. यहां एक 'हिमालयन रेड फॉक्स' यानी लाल लोमड़ी को बर्फ में चलते हुए देखा गया है. स्थानीय लोगों और वाइल्डलाइफ लवर्स ने इस शर्मीले शिकारी की तस्वीरें और वीडियो अपने कैमरे में कैद किए हैं. सिर्फ जोजिला ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मौजूद मशहूर पाराशर झील के पास भी इस खूबसूरत लोमड़ी को देखा गया है.

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इकोसिस्टम के लिए अच्छी खबर

जानकारों की मानें तो हिमालयन रेड फॉक्स का दिखना इस बात का सबूत है कि वहां का पर्यावरण (Ecosystem) अभी भी स्वस्थ है. ये लोमड़ी छोटे चूहों और जीवों का शिकार करके पहाड़ों के घास के मैदानों में कुदरती बैलेंस बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है. इसे 'हिल फॉक्स' के नाम से भी जाना जाता है और यह अक्सर इंसानों की नजरों से दूर ऊंचे इलाकों में ही रहना पसंद करती है.

क्यों नीचे आ रही हैं ये लोमड़ियां?

हिमालयन रेड फॉक्स अक्सर रात के अंधेरे में एक्टिव रहती है, इसलिए इसे दिन में देख पाना काफी मुश्किल होता है. लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी और बदलता क्लाइमेट इन्हें निचले इलाकों की तरफ आने पर मजबूर कर रहा है. खाने की तलाश और ठंड से बचने के लिए ये जीव अब उन रास्तों पर भी नजर आने लगे हैं जहां इंसानों की आवाजाही होती है. 

बर्फ के लिए खास बनावट

अगर इसकी तुलना गुजरात के रेगिस्तान में मिलने वाली लोमड़ी से करें, तो हिमालयन रेड फॉक्स काफी अलग दिखती है. ठंड से बचने के लिए इसके शरीर पर बहुत ही घना और गहरे नारंगी-राखी रंग का फर (बाल) होता है. यह मोटा फर इसे माइनस डिग्री तापमान और बर्फीली हवाओं से बचाता है, जो कुदरत का एक कमाल का करिश्मा है.

बचाव है बेहद जरूरी

हालांकि इन दुर्लभ लोमड़ियों का दिखना खुशी की बात है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे एक चेतावनी भी मान रहे हैं. पहाड़ों में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और मौसम में आ रहे बदलाव इन प्रजातियों के लिए खतरा बन सकते हैं. इन दुर्लभ जीवों को बचाने के लिए अब हमें हिमालय की बर्फीली वादियों और वहां के प्राकृतिक संतुलन को संभाल कर रखने की सख्त जरूरत है.

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