"60,000 रुपये महीने हैं, दो बच्चे हैं मेरे पास...", कैसे पत्नी को दूं गुजारा भत्ता?

एक अदालत की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एक व्यक्ति पूर्व पत्नी को मासिक गुजारा भत्ता देने में असमर्थता जताता है. उसने दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी और सीमित वेतन का हवाला दिया. वीडियो के बाद तलाक, एलिमनी और जेंडर-न्यूट्रल कानून पर बहस तेज हो गई है.

एक अदालत की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एक व्यक्ति पूर्व पत्नी को मासिक गुजारा भत्ता देने में असमर्थता जताता है. उसने दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी और सीमित वेतन का हवाला दिया. वीडियो के बाद तलाक, एलिमनी और जेंडर-न्यूट्रल कानून पर बहस तेज हो गई है.

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Ravi Prashant
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Court Hearing viral video

वायरल वीडियो Photograph: (X/@ShoneeKapoor)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अदालत की कार्यवाही का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस क्लिप में एक व्यक्ति माननीय न्यायाधीश के सामने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए एक्स वाइफ को मासिक गुजारा भत्ता देने में असमर्थता जता रहा है. इस वीडियो ने तलाक, एलिमनी और जेंडर-न्यूट्रल कानूनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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पैसे नहीं बचते हैं माय लॉर्ड

वीडियो में व्यक्ति अदालत को बताता है कि उसके दो नाबालिग बच्चे हैं और दोनों उसकी कस्टडी में हैं. वह कहता है, “दो बच्चे हैं, माय लॉर्ड, और दोनों मेरी कस्टडी में हैं." उसने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2015 में हुई थी, लेकिन 2021 में उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई. उसके अनुसार, पत्नी के जाने के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. व्यक्ति का दावा है कि शिकायत के दौरान उसकी पूर्व पत्नी ने किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की और साथ रहने से इनकार कर दिया.

न्यायाधीश ने किया सवाल 

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने उससे पूछा कि क्या उसकी पूर्व पत्नी ने 5,000 रुपये किराए और 10,000 रुपये गुजारा भत्ते की मांग की है. इस पर उसने सहमति में सिर हिलाया. न्यायाधीश ने फिर पूछा कि यह राशि बहुत अधिक कैसे है. इस पर व्यक्ति ने अपनी इनकम और खर्चों का डिटेल्स दिया. उसने बताया कि वह 60,000 रुपये मासिक वेतन पाता है, जिसमें से 20,000 रुपये वर्ष 2020 में लिए गए होम लोन की किस्त में कट जाते हैं. उसके पास 40,000 रुपये बचते हैं, जिनसे उसे बच्चों की पढ़ाई, घर-गृहस्थी और अन्य खर्च पूरे करने होते हैं.

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ यूजर्स ने मेंटेनेंस के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए जेंडर-न्यूट्रल कानूनों की मांग की. वहीं अन्य ने कहा कि अदालतों को हर मामले में तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. कुछ कमेंट्स में तीखी भाषा का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें एलिमनी व्यवस्था और नैतिकता को लेकर आलोचना की गई. हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मामले की पूरी कानूनी पृष्ठभूमि और अदालत का अंतिम निर्णय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है.

आखिर कहां का है ये मामला? 

वायरल पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह मामला किस शहर या राज्य की अदालत का है. वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है. फिलहाल यह क्लिप सोशल मीडिया पर बहस का केंद्र बनी हुई है और पारिवारिक कानूनों, गुजारा भत्ता व्यवस्था तथा अभिभावक अधिकारों को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दे रही है.

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