'कंगालों' का मिलन या 'भिखारियों' की सीधी उड़ान? सोशल मीडिया पर उड़ी जमकर धज्जियां!

14 साल के अंतराल के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सीधी हवाई सेवा फिर शुरू हो गई. बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-341 ढाका से कराची पहुंची. कराची एयरपोर्ट पर वॉटर सैल्यूट दिया गया. जैसे ही सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी आई, फिर क्या अब ट्रोलिंग हो रहा है.

14 साल के अंतराल के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सीधी हवाई सेवा फिर शुरू हो गई. बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-341 ढाका से कराची पहुंची. कराची एयरपोर्ट पर वॉटर सैल्यूट दिया गया. जैसे ही सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी आई, फिर क्या अब ट्रोलिंग हो रहा है.

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Ravi Prashant
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पाकिस्तान और बांग्लादेश एयरलाइंस Photograph: (X/@Official_PIA · 17h)

कहते हैं कि दुख में इंसान को साथी की तलाश होती है, और जब दो पड़ोसी एक जैसी 'कंगाली' और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हों, तो शायद उन्हें एक-दूसरे का कंधा ही सबसे मजबूत नजर आता है. कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब करीब 14 साल के लंबे वनवास के बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सीधी हवाई सेवा बहाल हुई. बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG-341 ने जैसे ही कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया, वहां इसका 'वॉटर सैल्यूट' से स्वागत हुआ. लेकिन जनाब, असली 'सैल्यूट' और 'स्वागत' तो सोशल मीडिया पर हो रहा है, जहां यूजर्स ने इन दोनों देशों की जमकर क्लास लगा दी है. 

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सोशल मीडिया पर आई मीम्स की बाढ़

जैसे ही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने सोशल मीडिया पर ज्ञान बघारा कि वे "आसमान के जरिए दिलों को जोड़ रहे हैं", वैसे ही इंटरनेट की जनता ने उन्हें जमीन की हकीकत दिखा दी. एक एक्स यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा, "भाई, ये तो वही बात हो गई कि एक अंधा दूसरे अंधे को रास्ता दिखा रहा है." वहीं एक अन्य एक्स यूजर ने तंज कसा, "दो भिखारी एक साथ, अब मिलकर कटोरा घुमाएंगे" सोशल मीडिया पर 'कंगलू' और 'भीखारी' जैसे शब्दों से पाकिस्तान और बांग्लादेश को नवाजा गया. लोगों का कहना है कि जब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है, तो ये हवाई सफर किसके लिए है? क्या एक देश से दूसरे देश कर्ज मांगने जाने के लिए यह सर्विस शुरू की गई है?

भारत न होता तो आज तुम न होते

मजाक से इतर, सोशल मीडिया का एक धड़ा काफी गुस्से में भी नजर आया. कई यूजर्स ने बांग्लादेश को उसका कड़वा इतिहास याद दिलाया. लोगों ने सवाल उठाया कि क्या बांग्लादेश 1971 के उन जख्मों को भूल गया है, जब पाकिस्तानी सेना ने लाखों निर्दोषों का कत्लेआम किया था? एक यूजर ने लिखा, "बांग्लादेशियों, थोड़ा तो इतिहास पढ़ लो. ये वही पाकिस्तानी फौज है जिसने तुम्हारी माताओं-बहनों की अस्मत लूटी थी. अगर 1971 में भारत की सेना और इंदिरा गांधी न होतीं, तो आज तुम्हारा वजूद ही नहीं होता" लोगों ने इसे बांग्लादेश की 'शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस' करार दिया और कहा कि कूटनीति के नाम पर अपने पूर्वजों के बलिदान को भूल जाना शर्मनाक है. 

कूटनीति या सिर्फ एक दिखावा?

भले ही अधिकारी इसे व्यापार और पर्यटन के लिए बड़ा कदम बता रहे हों, लेकिन जनता इसे 'तबाही का गठबंधन' कह रही है. पाकिस्तान पहले ही दाने-दाने को मोहताज है और बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद जो अराजकता फैली है, उसने उसे भी बैकफुट पर धकेल दिया है. ऐसे में यह सीधी उड़ान कनेक्टिविटी बढ़ाएगी या सिर्फ 'आतंक और अस्थिरता' का नया रूट बनेगी, यह बड़ा सवाल है. 

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