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सेक्युलरों के दबाव में दिल्ली दंगों पर किताब क्यों रुकी? दिल्ली दंगे की किताब आने से कौन डरा? किताब से अभिव्यक्ति की आज़ादी को कैसे खतरा? ब्लूम्सबरी इंडिया को किताब छापने से किसने रोका? 'शाहीनबाग' को चमकाएंगे, दंगे की किताब पर रोक लगाएंगे? इस मुद्दे पर जयपुर की दर्शक एकता अग्रवाल ने कहा, सबसे पहले तो मैं इनसे पूछना चाहूंगी कि ये कौन सी आजादी का ढिंढोरा पीटते हैं. जब किसी भी हिन्दू देवी देवता की नग्न तस्वीरें बनाई जाती हैं तो ये सेक्युलर गैंग उनके समर्थन में जाकर नाचते हैं. इनकी ऐसी कौन सी दोहरी नीति हैं जो इन्हें अलग-अलग अभिव्यक्ति की आजादी देती हैं.
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